आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य में क्वारेंटाइन सेंटर के लिए की गयी व्यवस्था मुकम्मल नहीं है। सरैयाहाट में हुई लापरवाही की घटना इसका बस उदाहरण है। सरैयाहाट में क्वारेंटाइन किये गये दो संक्रमित मरीजों के मिलने-जुलने को लेकर हुई घोर लापरवाही मामले में सरैयाहाट थानेदार को सस्पेंड कर दिया गया। यह चिंता की बात है कि अभी गढ़वा में जो एकमुश्त 20 कोरोना संक्रमित प्रवासी मजदूर समेत दूसरे स्थानों के चार और प्रवासी आगंतुक कोरोना पॉजिटिव मिले हैं वे किसी सरकारी व्यवस्था के तहत चलकर नहीं आये थे बल्कि खुद आये थे। शुक्र है कि प्रशासन को इसका पता चल गया और इनकी जांच करवायी गयी। वरना वे कोरोना फैलाने में बहुत बड़ा कारक बनते। जिस प्रकार लोग कोरोना संक्रमित से मिल रहे हैं वह एक बड़े खतरे को आमंत्रण देने जैसा है। ऐसे सेंटर होने या न होने का क्या फायदा जब उसका मकसद ही सार्थक न हो सके। अव्यवस्था का आलम इससे समझा जा सकता है कि कोई भी बेधड़क कोरोना संक्रमित मरीज से मिल रहा है।
क्वारेंटाइन किये गये लोग भी वहां से निकलकर मजे से जहां चाहे वहां जाकर लोगों से मिल रहे हैं। राज्य सरकार को इस दिशा में तमाम पहलुओं को देखते हुए ठोस और मुकम्मल व्यवस्था करनी होगी। दो तीन से अधिक न हो क्वारेंटाइन सेंटरबाबूलाल ने कहा कि क्वारेंटाइन सेंटर राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों में दो-तीन प्रमुख विद्यालयों या अन्य स्थानों से अधिक नहीं बनाना चाहिए। अधिक सेंटर होने से लापरवाही की संभावना बढ़ती है। सीमित सेेंटर होने से प्रखंड के प्रमुख अधिकारियों की निगाह भी उसपर बनी रहेगी। इनकी देखरेख के लिए पंचायत प्रतिनिधियों की भी जिम्मेवारी तय की जानी चाहिए। साथ ही क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी सहयोग लेने की जरूरत है। संकट की इस घड़ी में जनसेवा के कार्य से शायद ही किसी को इंकार होगा। इसके अलावा राज्य सरकार को आम लोगों को बताना होगा कि यह केवल सरकार और प्रशासन का ही दायित्व नहीं है बल्कि हर जिम्मेवार नागरिक को इस घड़ी में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। ऐसा होने से अव्यवस्था की गुंजाइश कम होगी। हम भी समाज के प्रबुद्ध लोगों से आग्रह करेंगे कि इस काम में सरकार को सहयोग करें। यह लापरवाही राज्य के लिए मुसीबत न बन जाये इसलिए समय रहते इसपर विचार करने की जरूरत है।