- गरीबों को कर्ज नहीं, आर्थिक सहायता चाहिए
- बिना प्लानिंग के लॉकडाउन होने से गरीब बेहाल
- केंद्र सरकार को जगाने के लिए स्पीक अप इंडिया कार्यक्रम के तहत कांग्रेस का अभियान
रांची। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सह मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने बताया कि वैश्विक महामारी कोराना की वजह से आमलोगों का जीवन कष्टमय हो गया है। पूरे देश में बिना किसी तैयारी और प्लानिंग के लॉकडाउन लागू कर दिया गया। लोग भूखे-प्यासे, पैदल हजारों किलोमीटर सड़कों पर चलने के लिए मजबूर हुए, कई लोगों की जान चली गयी। इस दौरान झारखंड सरकार ने अपने प्रयास से राज्य की सीमा में हाइवे पर चल रहे सभी लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करने और उन्हें वाहन उपलब्ध करा कर गंतव्य की ओर रवाना करने पर फोकस किया। इसके अलावा देशभर के विभिन्न हिस्सों में प्रवासी कामगारों को खर्च के लिए कुछ राशि भी उपलब्ध करायी गयी और उनकी घर वापसी के लिए व्यापक इंतजाम किये गये। घर लौटने के बाद मनरेगा समेत अन्य योजनाओं के माध्यम से उन्हें रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन झारखंड में लॉकडाउन के दौरान राजस्व संग्रहण काफी कम हो गया है। केंद्र सरकार तुरंत बकाया का भुगतान करे। इसके अलावा प्रधानमंत्री सभी प्रवासी श्रमिकों और बेरोजगार हो चुके युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद करें। प्रवासी श्रमिकों को लॉकडाउन संकट से निपटने के लिए तत्काल दस-दस हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराने, मनरेगा के तहत 100 दिन की जगह 200 दिन काम देने, लोन और कर्ज की जगह सहायता उपलब्ध कराने, सभी गरीब परिवारों को अगले छह महीने तक 7,500 रुपये देने का प्रावधान किया जाये। गुरुवार को उक्त बातें केंद्र सरकार को जगाने के लिए स्पीक अप इंडिया कार्यक्रम के तहत सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान के मौके पर डॉ रामेश्वर उरांव ने कहीं।मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री खुद कहते हैं कि यह चाय बनाने वाले की सरकार है, इसलिए सरकार उनकी मुश्किलों को दूर करे। प्रतिदिन कमाने-खाने वाले परिवारों की चिंता करे। इन्हें कर्ज की जरूरत नहीं है, बल्कि आर्थिक सहायता की जरूरत है।
गरीब परिवारों को छह महीने तक 7500 रुपये भत्ता दे केंद्र: डॉ रामेश्वर
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