रांची। पूर्व मंत्री सह विधायक बंधु तिर्की ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर संविदा पर कार्यरत कर्मियों के नियमितीकरण पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। श्री तिर्की ने अपने पत्र में कहा है कि सचिवालयों और सरकार के विभिन्न कार्यालयों में वर्षों से संविदा पर कार्यरत कर्मियों के नियमितीकरण का मामला सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के उपरांत सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। जानकारी के अनुसार स्वीकृत पद की जगह रिक्त पदों के विरुद्ध नियमित करने पर सहमति भी बनी है, लेकिन संविदा पर अधिकतर कर्मी कंप्यूटर आॅपरेटर या इसके समकक्ष पदों पर कार्यरत हैं, जबकि रिक्तियां टंकक, लोअर डिवीजन क्लर्क और अपर डिवीजन क्लर्क की भी है। इन परिस्थितियों में कंप्यूटर आॅपरेटर के पद पर कार्यरत कर्मियों को अन्य पदों पर समायोजित कर नियमित करने पर स्थानीय बेरोजगार युवक अपने हक से वंचित हो जा सकते हैं।

दूसरी ओर इस तथ्य की भी समीक्षा करने की आवश्यकता है कि संविदा पर नियुक्ति के क्रम में आरक्षण रोस्टर का पालन हुआ है या नहीं। ऐसा देखा गया है कि राज्य गठन के पश्चात बड़े पैमाने पर भाई-भतीजावाद की तर्ज पर संविदा पर लोगों को बहाल किया गया, जबकि उस समय सरकारी नौकरियों में नियोजन की झारखंड राज्य की अपनी कोई नीति नहीं बनी थी। बावजूद इसके राज्य के सचिवालयों से लेकर विभिन्न कार्यालयों में परिचितों सगे, संबंधियों को संविदा या दैनिक मानदेय पर बहाल किया गया है। ऐसे संविदा कर्मियों की सेवा नियमितीकरण से पूर्व स्वीकृत पद रिक्त सहित आरक्षण के अनुपालन संबंधी मामलों की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि स्थानीय युवाओं को उनके अवसरों से वंचित होना पड़ सकता हो, तो एक औपचारिक खुली प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से ही उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया अपनायी जानी चाहिए। इससे वर्षों से कार्यरत कर्मियों को कुछ रियायत देने पर विचार किया जा सकता है।

Share.

Comments are closed.

Exit mobile version