रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी में बढ़े कोरोना संकट पर मौखिक रूप से राज्य सरकार को जवाब दायर करने का निर्देश दिया। राज्य सरकार से पूछा है कि कंटेनमेंट जोन हिंदपीढ़ी की कितनी आबादी है, यहां कोरोना संक्रमण को लेकर कितने लोगों की जांच की गयी। हिंदपीढ़ी में कितने लोग कोरोना पॉजिटिव पाये गये, कितने ठीक हुए और अब वहां कितने कोरोना संक्रमित बचे हैं।
हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कोरोना माहामारी को लेकर कोर्ट के स्वत: संज्ञान पर सुनवाई की। कोर्ट ने हिंदपीढ़ी में कोरोना संक्रमण के विवरण के बारे में राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
खंडपीठ ने सरकार से जानना चाहा कि प्रवासी मजदूर जो झारखंड आ रहे हैं उनके लिए स्टैंडर्ड आॅपरेटिंग प्रोसिडियोर क्या है। कितने प्रवासी मजदूरों की कोरोना जांच की गयी। प्रवासी मजदूरों के इलाज, कंटेनमेंट के लिए क्या किया जा रहे हैं। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 29 मई निर्धारित की। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने तथा रिम्स की ओर से अधिवक्ता एके सिंह ने पैरवी की। वहीं खंडपीठ ने एक अन्य जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि राज्य में ट्रांसजेंडरों को राशन देने के मामले में क्या व्यवस्था की गयी है। बता दें हाइकोर्ट के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने चीफ जस्टिस को पत्र लिख कर रिम्स में स्वास्थ्यकर्मियों के पीपीइ किट की कमी की बात कहते हुए एक पत्र लिखा था। जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने गंभीरता दिखाते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था।