राज्य सरकार गांवों पर कर रही है फोकस
राज्य में दवाओं की कमी का संकट है
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि यह समय आपस में झगड़ने या शिकायत करने का नहीं है। अभी पूरा देश महामारी के जिस तूफान में फंसा है, उससे बाहर निकलने की जरूरत है। झगड़े तो बाद में होते रहेंगे। वह शनिवार को एक निजी टीवी चैनल द्वारा आयोजित इ-विमर्श कार्यक्रम में सवालों के जवाब दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात खुल कर रखी। इनमें कोरोना की दूसरी लहर से निबटने के प्रयास, तीसरी लहर से मुकाबले की तैयारी और राज्य की अर्थव्यवस्था की गाड़ी को चलाये रखने के लिए उठाये गये कदम के साथ ब्लैक फंगस जैसी बीमारी से निपटने की रणनीति और दवाओं की कमी जैसे मुद्दे शामिल थे।
शुरूआती अफरा-तफरी के बाद स्थिति अब नियंत्रण में
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने कोरोना की दूसरी लहर से डट कर मुकाबला किया है। शुरूआती अफरा-तफरी के बाद सरकार ने स्थिति को नियंत्रित किया और स्वास्थ्य से लेकर दूसरे क्षेत्रों में कई काम किये। एंबुलेंस, आॅक्सीजन युक्त बेड और आॅक्सीजन की जरूरतें पूरी करने के लिए सरकार ने ठोस रणनीति बना कर काम किया। इसका लाभ भी मिला। अब राज्य में एंबुलेंस का सायरन कभी-कभार ही सुनाई देता है। यह हमारे लिए राहत की बात है। हमने अपने सीमित संसाधनों से दूसरी लहर पर नियंत्रण किया। लेकिन यह आराम करने का वक्त नहीं है। अब झारखंड तीसरी लहर से मुकाबले की तैयारी में जुटा है। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। हम हर घर तक पहुंचने का अभियान चला रहे हैं, ताकि राज्य के हर व्यक्ति के स्वास्थ्य की जानकारी ले सकें और जरूरत पड़ने पर उसका समय रहते समुचित इलाज कर सकें।
ब्लैक फंगस से चिंता, दवा की कमी है
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ब्लैक और ह्वाइट फंगस गंभीर चिंता का विषय है। सरकार इसके लिए ठोस कार्य योजना बना रही है। हमारे डॉक्टर ऐसे मरीजों का इलाज करने में जुटे हैं। हमें कुछ उपलब्धियां भी हासिल हुई हैं। लेकिन चिंता अभी दूर नहीं हुई है। दवाओं की कमी की बाबत उन्होंने कहा कि झारखंड में दवाओं की कमी है। यह कमी जमाखोरी और कालाबाजारी के कारण अधिक है। सरकार इस पर निगाह रख रही है।
कोशिश रही कि अर्थव्यवस्था की गाड़ी चलती रहे
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार के लॉकडाउन के अनुभवों से सीखते हुए इस बार हमने मिश्रित उपाय अपनाया, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। हमने संक्रमण को भी नियंत्रित किया और राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी इसका विपरीत असर नहीं पड़ा। स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह का कदम बहुत कारगर रहा।
यह शिकायत का नहीं, मिल कर काम करने का वक्त
केंद्र से मिलनेवाली मदद के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर बाद में बात होती रहेगी। अभी शिकायत का समय नहीं है, बल्कि मिल कर काम करने का वक्त है। एक बार देश इस संकट से निकल जाये, तो फिर शिकायत भी होती रहेगी। उन्होंने कहा कि 130 करोड़ लोगों का यह देश यदि ठान ले, तो कोई भी काम असंभव नहीं हो सकता। इसलिए अभी सभी लोगों को सभी भेदभाव भुला कर लड़ने पर ध्यान लगाना चाहिए।