गोड्डा। जिले के मेहरमा प्रखंड के माल प्रतापपुर गांव के एक मजबूर पिता को अब प्रति माह अपने मासूम बेटे जो थैलेसीमिया रोग से ग्रसित है, उसे लेकर जामताड़ा सदर अस्पताल नहीं जाना होगा। मासूम का इलाज अब जिला मुख्यालय के सदर अस्पताल में होगा। गोड्डा सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में ही बच्चे को प्रति माह नि:शुल्क ओ निगेटिव ब्लड चढ़ाये जायेंगे। सिविल सर्जन डॉ एसपी मिश्रा ने कहा कि थैलेसीमिया पीड़ित कई मरीजों का यहां इलाज हो रहा है। मरीज के स्वजन को सिर्फ चार दिन पूर्व ब्लड ग्रुप की जानकारी देकर अपना पंजीयन करा लेना है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से सारी व्यवस्था कर दी जायेगी। उन्होंने कहा कि मेहरमा के माल प्रतापपुर गांव के पीड़ित मासूम चार वर्षीय विवेक कुमार के बारे में अब तक कोई जानकारी सदर अस्पताल या मेहरमा स्वास्थ्य केंद्र में नहीं दी गयी थी। अगर विभाग के संज्ञान में यह मामला होता तो उन्हें जिला अस्पताल में ही इलाज की सारी सुविधाएं मुहैया करा दी जाती।

जन्म के छह महीने के बाद से खून के लिए जद्दोजहद
बता दें कि माल प्रतापपुर गांव के दिहाड़ी मजदूर दिलीप यादव को अपने बेटे की जान के लिए हर माह करीब 300 किमी की दूरी साइकिल से तय करनी होती है। लॉक डाउन में थैलेसीमिया पीड़ित बेटे विवेक कुमार को खून दिलाने के लिए वह साइकिल पर बैठाकर मेहरमा से गोड्डा, दुमका होते हुए जामताड़ा तक की दूरी तय करता है। विवेक का ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव रहने के कारण उसे खून मिलने में हर बार कठिनाई का सामना करना पड़ता है। पर बेटे की जान के सामने दिलीप यादव को हर कठिनाई मामूली लगती है। यही कारण है कि बेटे के जन्म के छह माह बाद से ही वह लगातार खून दिलाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। जामताड़ा सदर अस्पताल में दिलीप यादव को दो युवक चेतन कृष्ण यादव तथा विश्वजीत सिंह से मदद मिल रही है।

लॉकडाउन में दिल्ली से आ गया घर
दिलीप यादव कहते हैं लॉकडाउन में दिल्ली से घर आ गया। इस दौरान लगातार साइकिल से जामताड़ा जाकर बच्चे को खून चढ़वा रहा हूं। कई बार गोड्डा ब्लड बैंक से भी खून मिला पर ओ निगेटिव खून बड़ी मुश्किल से ही मिल पाता है। जामताड़ा में जान पहचान के भाई ने बच्चे की जान बचाने के लिए खुशी-खुशी रक्तदान करने की बात कही तो हर माह जामताड़ा ही चला जाता हूं। दिलीप ने बताया कि विवेक के इलाज में दस लाख रुपये की जरूरत है। महागामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह को भी गंभीर बीमारी योजना के तहत कागजात दिये हैं। अगर वहां से स्वीकृत हो गया तथा अब बेटा पांच साल का हो जायेगा तो इसका राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवा कर आयुष्मान कार्ड से पांच लाख तथा कुछ मदद समाज के लोगों ने कर दी तो इसका इलाज गंगाराम अस्पताल दिल्ली में जरूर करायेंगे।

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