झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की हस्तक्षेप याचिका
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। झारखंड सरकार ने 18 से 44 वर्ष आयुवर्ग के लोगों को टीका लगाने में हो रही परेशानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महाधिवक्ता राजीव रंजन के अनुसार राज्य सरकार ने एलए संख्या 62455/ 2021 के माध्यम से कई बिंदुओं पर निर्देश देने के लिए गुहार लगायी है। सरकार की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका में कहा गया है कि युवाओं के टीकाकरण की प्रक्रिया से केंद्र को अलग कर दिया जाये। झारखंड सरकार का कहना है कि कोविन एप से रजिस्ट्रेशन में लोगों को परेशानी हो रही है, जिससे टीकाकरण में तेजी नहीं आ रही है। टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था आसान होनी चाहिए थी, ताकि लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन मिल सके।
झारखंड सरकार ने भी अमृत वाहिनी एप बनाया है, जो काफी सरल है और इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति आसानी से वैक्सीन लेने की प्रक्रिया पूरी कर सकता है। याचिका में कोविन की जगह अमृत वाहिनी एप का इस्तेमाल करने की अनुमति देने का आग्रह किया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि 18-45 वर्ष के करीब 1.40 करोड़ लोगों के टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू की गयी है, लेकिन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की जटिलता के कारण इसमें बाधा आ रही है। याचिका में कहा गया है कि राज्य के कई इलाकों में लोगों के पास स्मार्ट फोन नहीं है, जिससे वे टीका लेने से वंचित हो सकते हैं। इसके अलावा झारखंड की 48 फीसदी आबादी अनुसूचित इलाके में रहती है, जो डिजिटल रूप से शिक्षित नहीं है। राज्य सरकार ने लोगों के सुविधा को देखते हुए अमृत वाहिनी एप तैयार किया, जिसका इस्तेमाल वैक्सीनेशन में किया जा सकता है। झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की शीघ्र सुनवाई करने का भी आग्रह किया है।
बता दें कि कोरोना महामारी को देखते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। इसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लगातार चल रही है। इसी मामले में झारखंड सरकार की ओर से यह याचिका दायर की गयी है।