शिमला। पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा है कि आरक्षण व्यवस्था का वास्तविक लाभ केवल गरीब और जरूरतमंद लोगों तक ही सीमित रहना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि संपन्न और उच्च पदस्थ परिवारों को बार-बार आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
शांता कुमार ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि कर्नाटक के एक मामले में ऐसे परिवार के बच्चे को आरक्षण का लाभ मिला, जिनके माता-पिता उच्च प्रशासनिक पदों पर थे। इस पर लंबे कानूनी संघर्ष के बाद मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा, जहां कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संपन्न वर्ग के बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार यह टिप्पणी कर चुका है कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आगे बढ़ाना है, न कि उन परिवारों को जो पहले से ही सशक्त स्थिति में पहुंच चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार में क्रीमी लेयर को बाहर रखने पर लगातार चर्चा होती रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तविक स्थिति यह है कि कई प्रभावशाली और संपन्न परिवार बार-बार आरक्षण का लाभ ले लेते हैं, जबकि वास्तविक जरूरतमंद लोग अब भी पीछे रह जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश के कई राज्यों से आए गरीब मजदूर आज भी कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति के बावजूद असमानता बनी हुई है और बड़ी संख्या में लोग गरीबी में जीवन जी रहे हैं। ऐसे में कल्याणकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ सही पात्रों तक पहुंचना बेहद जरूरी है।
शांता कुमार ने केंद्र सरकार से अपील की कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अंत्योदय की भावना के अनुरूप ऐसी नीति बनाई जाए, जिससे आरक्षण और सामाजिक योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।

