नई दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई। 4 मई 2026 को पाँच राज्यों – पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी – के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भारतीय राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया। सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना के शुरुआती रुझानों ने ही साफ कर दिया था कि इस बार जनता ने बड़ा बदलाव चुना है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने पहली बार दोहरे शतक के पार जाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि असम में भाजपा ने हैट्रिक लगाते हुए तीसरी बार सरकार बनाई। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने सबको चौंकाते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने वामपंथी एलडीएफ को करारी शिकस्त देकर सत्ता हासिल की, तो पुदुचेरी में एनडीए ने शानदार जीत दर्ज की। आइए, विस्तार से जानते हैं हर राज्य का पूरा गणित।
1. पश्चिम बंगाल – भाजपा का ऐतिहासिक परचम, ममता को एक करारा झटका
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का नतीजा उम्मीदों से भी बढ़कर रहा। भारतीय जनता पार्टी ने 294 में से 192 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) महज 94 सीटों पर सिमट गई, जबकि वाम मोर्चा व कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया। यह भाजपा के लिए बंगाल में अपनी पहली सरकार बनाने का ऐतिहासिक अवसर है।
ममता बनर्जी को भारी नुकसान
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन यहाँ भी भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी। शुरुआती रुझानों में शुभेंदु आगे चल रहे थे, हालाँकि बाद में ममता ने इस सीट को बचा लिया, लेकिन पार्टी को कुल मिलाकर प्रचंड हार का सामना करना पड़ा। नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने जीत दर्ज करते हुए कहा, “बंगाल में सत्ता विरोधी लहर थी, हिंदू वोट एकजुट हुआ। आज बंगाल का अंधेरा छंट गया।”
भाजपा नेताओं का उत्साह
कोलकाता के भाजपा मुख्यालय में सुबह से ही जश्न का माहौल था। कार्यकर्ताओं ने झालमुड़ी और रसगुल्ले बांटकर खुशियाँ मनाईं। भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा, “हर बंगाली अपने आप को उस भय की दुनिया से आजाद कराना चाहता था। आज बंगाल ने अपने अस्तित्व और पहचान को पा लिया है।” केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “यह केवल बंगाल की विजय नहीं, बल्कि भारत की विजय है। अवैध घुसपैठ ने बंगाल को तबाह कर दिया था और इसकी जिम्मेदार टीएमसी थी।”
शशि थरूर और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया
हालाँकि बंगाल में भाजपा की जीत पर कांग्रेस खामोश रही, लेकिन केरल में उसकी सरकार बनने से उसे बड़ी राहत मिली।
2. असम – भाजपा की हैट्रिक, हिमंत बिस्वा सरमा डिस्टिंक्शन से पास
असम विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने अपना वर्चस्व बरकरार रखते हुए तीसरी बार सरकार बनाने का गौरव हासिल किया। 126 सीटों वाले इस राज्य में भाजपा ने 98 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस महज 25 सीटों पर सिमट गई। बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट और असम गण परिषद ने मिलकर गठबंधन को मजबूत किया।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जालुकबारी सीट से बड़े अंतर से जीत हासिल की। असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा, “हिमंत बिस्वा सरमा न केवल पास हुए, बल्कि डिस्टिंक्शन से पास हुए।” कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई जोरहाट सीट से भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी से 23 हजार से अधिक वोटों से हार गए। यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था।
असम की जनता ने विकास को चुना – असम के मतदाताओं ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व को प्राथमिकता दी। डबल इंजन सरकार के नारे ने एक बार फिर काम किया। एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा को बहुमत मिलने की संभावना थी, लेकिन इतनी बड़ी जीत ने सबको चौंका दिया।
3. तमिलनाडु – टीवीके का सियासी तूफान, स्टालिन को हार
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 ने सबसे बड़ा उलटफेर किया। अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने पहला चुनाव लड़ते ही 109 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया। एआईएडीएमके 73 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही, जबकि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की द्रमुक महज 52 सीटों पर सिमट गई। भाजपा 2 सीटों पर सिमट गई।
स्टालिन सहित 15 मंत्री पीछे
यह द्रमुक के लिए एक करारी शिकस्त थी। मुख्यमंत्री स्टालिन कोलाथुर सीट से 2 हजार से अधिक वोटों से पीछे चल रहे थे। उनके बेटे और डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन भी चेपक-थिरुवल्लीकेनी सीट से पीछे रहे। कुल 15 मंत्री अपनी-अपनी सीटों से हार गए। विजय की बहन ने जीत पर कहा, “वे एक युवा और एनर्जेटिक इंसान हैं, और तमिलनाडु में हर कोई उनसे बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहा है।”
टीवीके कार्यकर्ताओं का उत्साह
टीवीके के चुनाव चिन्ह ‘सीटी’ के साथ कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। चेन्नई से लेकर कोयंबटूर तक जश्न का माहौल था। विजय ने अभी तक पद की घोषणा नहीं की है, लेकिन चर्चा है कि वे खुद मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
4. केरल – यूडीएफ की शानदार वापसी, वामपंथ को लगा झटका
केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए 96 सीटों पर जीत दर्ज की। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) 41 सीटों पर सिमट गया, जबकि भाजपा 2 सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही।
कांग्रेस मुख्यालय में जश्न
तिरुवनंतपुरम स्थित कांग्रेस मुख्यालय में माहौल त्योहार जैसा था। प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ, शशि थरूर, रमेश चेन्निथला और वीडी सतीशन सभी मुख्यालय पहुंचे। केसी वेणुगोपाल ने जीत का केक काटा और सभी नेताओं को खिलाया। शशि थरूर ने कहा, “हम इस प्रदेश की भलाई के लिए वे सब करने को तैयार हैं जो आवश्यक है। 10 वर्षों से सरकार की जो कमियां थीं, हम उन पर काम करेंगे।”
वामपंथ के भविष्य पर चिंता
सीपीआई महासचिव डी राजा ने चिंता जताई कि अगर केरल में भी एलडीएफ हार जाता है, तो वामपंथ का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। केरल लेफ्ट की आखिरी मजबूत चौकी थी, लेकिन यहाँ भी हार का सामना करना पड़ा।
5. पुदुचेरी – एनडीए का दबदबा, रंगास्वामी ने रचा इतिहास
पुदुचेरी विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने 22 सीटों पर जीत हासिल कर बहुमत हासिल किया। कांग्रेस गठबंधन 6 सीटों पर सिमट गया। मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी ने थट्टांचावडी सीट से 4,441 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह उनकी लगातार चौथी बार सीएम बनने की ओर कदम है।
रंगास्वामी पहले से ही चार बार (2001-2006, 2006-2008, 2011-2016, 2021-2026) मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस जीत के साथ वे पुदुचेरी के सबसे सफल नेताओं में गिने जाने लगे हैं।
जश्न, झालमुड़ी और विजय रैलियाँ
पूरे देश में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पर बैंड-बाजे के साथ मिठाइयाँ बाँटी गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम 6:30 बजे मुख्यालय पहुँचे और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “बंगाल की जीत मोदी की गारंटी की जीत है।”
सिलीगुड़ी, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई और पटना में विजय रैलियाँ निकाली गईं। वहीं, कुछ जगहों पर झड़पें भी हुईं। आसनसोल में भाजपा-टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा हुई, जहाँ पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बांकुरा और कूचबिहार में भी झड़पों की खबरें आईं। चुनाव आयोग ने विजय रैलियों पर रोक लगा दी, लेकिन फिर भी कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर रहा।
प्रमुख नेताओं के बयान
शिवराज सिंह चौहान (केंद्रीय मंत्री): “बंगाल में जो हो रहा था, वह वोट बैंक की राजनीति के कारण था। अवैध घुसपैठ ने बंगाल को तबाह कर दिया था। यह भारत की विजय है।”
हुमायूं कबीर (AJUP प्रमुख): “यह तो होना ही था। ममता बनर्जी ने तीन बार मुख्यमंत्री रहते हुए जनता को धोखा दिया। मैं दोनों सीटें जीतूंगा।”
शुभेंदु अधिकारी: “पूरा बंगाल परिवर्तन के लिए तैयार था। सत्ता विरोधी लहर के साथ हिंदू वोट एकजुट हुआ।”
रवि किशन: “हर बंगाली अपने आप को भय से आजाद कराना चाहता था। आज बंगाल ने अपनी पहचान पा ली।”
डी राजा (CPI महासचिव): “यह सभी धर्मनिरपेक्ष संगठनों के लिए वास्तविक सबक है। वामपंथ को पुनर्जीवित करना होगा।”
निष्कर्ष – 2026 का चुनावी भूकंप
4 मई 2026 के चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया कि जनता बदलाव चाहती है। पश्चिम बंगाल में 34 साल के वामपंथ और 15 साल के तृणमूल शासन के बाद भाजपा ने अपनी सरकार बनाई। असम में लगातार तीसरी बार भाजपा की जीत ने पूर्वोत्तर में पार्टी की पैठ को मजबूत किया। तमिलनाडु में टीवीके का उदय द्रविड़ राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। केरल में यूडीएफ की वापसी ने कांग्रेस को जीवनदान दिया। पुदुचेरी में एनडीए का किला मजबूत हुआ।
कुल मिलाकर, यह चुनाव भारतीय राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। अब सबकी निगाहें नई सरकारों के कामकाज और 2029 के लोकसभा चुनाव के संकेतों पर टिकी होंगी।

