पूर्वी सिंहभूम। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल गौरव की अदालत ने वर्ष 2013 में उपायुक्त कार्यालय परिसर में जन समस्याओं को लेकर हुए धरना-प्रदर्शन और कथित हंगामे के मामले की सुनवाई की। अदालत ने मंगलवार को सभी आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। इस मामले में पूर्व जिला पार्षद किशोर यादव, राहुल सिंह, धनंजय सिंह, डीएन सिंह और आरबी सरन भी आरोपित बनाये गये थे। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप को सिद्ध करने में असफल रहा, जिसके कारण सभी आरोपितों को बरी किया जाता है।
मिली जानकारी के अनुसार, 4 जनवरी 2013 को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सैकड़ों कार्यकर्ता विभिन्न जन समस्याओं—जैसे स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक लापरवाही और जन सुविधाओं की मांग—को लेकर जमशेदपुर स्थित उपायुक्त कार्यालय में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी।
इस संबंध में उपायुक्त कार्यालय के लिपिक अलखेन खलको के बयान पर बिष्टुपुर थाना में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल तीन गवाह पेश किये गये, लेकिन अदालत ने पाया कि गवाहों के बयान आरोपों को ठोस रूप से साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, बविता जैन, धर्मेंद्र सिंह निकू और दीपा सिंह ने विस्तृत और प्रभावी दलीलें प्रस्तुत कीं।

