रांची। रांची के खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन और वहां बने 12 घरों को ध्वस्त किए जाने के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए प्रार्थी महादेव उरांव की ओर से दाखिल जवाब पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने शपथ पत्र में न केवल झूठे तथ्य पेश किए, बल्कि न्यायालय को गुमराह करने की भी कोशिश की। विशेष रूप से पीड़ितों के साथ हुए पैसों के लेन-देन की जानकारी छिपाने को अदालत ने गंभीरता से लिया और महादेव उरांव के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करते हुए पूछा कि उनके विरुद्ध फौजदारी कानूनों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने उन 12 परिवारों को बड़ी राहत दी है जिनके घरों पर प्रशासन का बुलडोजर चला था। अदालत ने हस्तक्षेपकतार्ओं (पीड़ित परिवारों) को दी गई अंतरिम राहत को अगले आदेश तक के लिए बढ़ा दिया है, जिसका अर्थ है कि अब उनके खिलाफ फिलहाल कोई पीड़क कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। इस मामले में हस्तक्षेपकतार्ओं की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता गौरव राज ने दलीलें पेश कीं। अब इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई 19 जून को निर्धारित की गई है। इससे पहले की कार्यवाही में हेहल अंचल कार्यालय ने अदालत को बताया था कि पीड़ितों को तीन बार नोटिस देने के बावजूद दस्तावेज जमा नहीं किए गए थे, जिसके बाद ही मकान तोड़ने की कार्रवाई की गई। हालांकि, अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाए थे कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर सीधे मकानों को ध्वस्त करने का निर्णय क्यों लिया गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने लाखों रुपये की दर से यह जमीन खरीदी थी और करोड़ों का भुगतान करने के बाद वहां वर्षों से रह रहे थे। अब इस पूरे विवाद में याचिकाकर्ता की ओर से तथ्यों को छिपाने की बात सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

