लद्दाख सीमा विवाद को हल करने के लिए चीन और भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अफसरों के बैठक खत्म हो गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन यह सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई।
चीन सेना के द्वारा भारत में तीन जगहों पर अतिक्रमण को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन सभी बेनजीता रही हैं। आज भी भारत-चीन सेना कमांडर की स्तर की बैठक मोल्डो चुशुल में एलएसी के आगे के स्थान पर हुई, जिसमें किसी भी तरह का परिणाम नहीं निकल पाया है। सूत्रों के अनुसार आज की बैठक में कोई बड़ी सफलता नहीं, मिली लेकिन सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई।
हालांकि इस बैठक से पहले ही चीन सरकार के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इसके संकेत दे दिए थे। उसने लिखा कि सैन्य बैठक से दोनों देशों के बीच जारी तनाव के कम होने की उम्मीद है, लेकिन हम सीमा मुद्दे पर नहीं झुकेंगे। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा था कि भारत को सीमा पर अपनी भड़काऊ गतिविधियों को तुरंत रोक देना चाहिए और चीनी सीमा का सम्मान करना चाहिए, अन्यथा इस गतिरोध का वास्तविक हल नहीं निकल सकेगा। चीनी अखबार ने भारतीय सेना को गालवान घाटी क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगाने की बात भी कही है।
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने सैनिकों और हथियारों को यहां पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यहां पर उन्नत हथियार और ऊंचाई पर काम आने वाले दूसरे उपकरणों के साथ यहां पर पहुंच रही है। रिपोर्टों में बताया गया है कि पीएलए कई उन्नत हथियार प्रणाली और तिब्बती पठार के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑपरेशन के लिए परिष्कृत जेट को इस इलाके में भेजा है। भारतीय सेना ने लेह के लद्दाख सीमा पर ‘ऑपरेशनल अलर्ट’ करते हुए सैनिकों को बढ़ाया है।
डोकलाम गतिरोध के बाद से पीएलए ने अपने हथियारों के जखीरे में इजाफा किया है। उसने टाइप 15 टैंक, जेड -20 हेलीकॉप्टर, जीजे -2 हमला ड्रोन और पीसीएल -181 उन्नत हॉवित्जर जैसे हथियार तिब्बत के पठार पर भेजे हैं। इस बात की जानकारी खुद सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपल्स डेली में दी गई है।