मुजफ्फरनगर। कोरोना का कहर अब शहर से गांव की ओर बढ़ने लगा है। यह सभी के लिए घातक हो सकता है। जिले के दो गांवों में काेरोना संक्रमित मिलने से  आम लोगों के साथ प्रशासन की चिन्ताएं भी बढ़ गयी हैं। क्योंकि शहर की तुलना में गांव के लोग इस महामारी के लक्षणों से कम जागरूक हैं। जनपद की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या देहात में ही निवास करती है। इसलिये गांवों में खतरा बहुत अधिक हो गया है।
गत दिनों मुजफ्फरनगर जनपद के गांव सिसौली में एक महिला कोरोना पॉजिटिव पायी गयी थी। हालांकि वह इलाज के लिए नोएडा गयी थी और वहां पर संक्रमित हो गयी थी। स्वास्थ्य विभाग ने उसे एकांतवास कर दिया था। इसके बाद वह जांच में निगेटिव पायी गयी थी। गुरुवार को देर शाम आयी जांच रिपोर्ट में जनपद के गांव कूकड़ा निवासी एक पुरुष और गांव आदमपुर की महिला की जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव मिलना जिला प्रशासन के लिये चिन्ता का सबब बन गया है । यदि कोरोना का प्रकोप गांव में फैल गया तो इसे नियन्त्रित करना बहुत कठिन हो जाएगा। अभी जनपद में कोरोना पॉजिटिव संख्या 53 है। यदि गांव में कोरोना का प्रकोप बढ़ा तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है। क्योंकि जनपद की संख्या लगभग 15 लाख है जिसमें शहरी संख्या लगभग 20 प्रतिशत है। इस प्रकार जनपद की कुल संख्या का 80 प्रतिशत देहात में निवास करती है । दूसरे देहात में स्वास्थ्य केन्द्रों पर डाक्टर व पैरा मैडिकल स्टाफ भी पर्याप्त संख्या में नही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि वह किसी भी स्थिति को नियन्त्रण करने में समक्ष है।
मुजफ्फरनगर जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी डा. प्रवीण चोपड़ा का कहना है कि शहर की तुलना में गांव में नियन्त्रित करना कठिन तो होगा। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग को मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। क्योंकि ग्रामीण को उसके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना पड़ता है और शहरी स्वयं जागरूक होता है । स्वास्थ्य विभाग इसी लिए सभी को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक करने के लिए सक्रिय है।
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