New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वो एलजी पालीमर्स इंडस्ट्री को सील करने के खिलाफ और कंपनी परिसर में प्रवेश की इजाजत देने की मांग के लिए दायर याचिका पर जल्द फैसला करें। जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने एलजी पालीमर्स की ओर से जुर्माने के तौर पर जमा किए गए 50 करोड़ रुपये के बांटने पर दस दिनों की रोक लगा दी है।
सुनवाई के दौरान एलजी पालीमर्स इंडस्ट्री की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने एनजीटी के पिछली 1 जून के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें एनजीटी ने कहा था कि उसे इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने और अनुशंसाएं करने का अधिकार है। रोहतगी ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने 30 लोगों में से दो लोगों को कंपनी परिसर में इसलिए प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी कि वे वकील थे। उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है।
रोहतगी ने कहा कि कंपनी का परिसर सील करने का आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला असंवैधानिक है। यह फैसला बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के किया गया है। उन्होंने कंपनी के परिसर का सील खोलने का आदेश देने की मांग की। तब जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि हम नहीं मानते कि ये फैसला असंवैधानिक है। गैस लीक के लिए कंपनी जिम्मेदार है। रोहतगी ने कहा कि कंपनी के निदेशकों को देश से बाहर जाने पर रोक के आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि वे अपराधी नहीं हैं कि भाग जाएंगे। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट में यह मामला लंबित है और वो छुट्टियों की वजह से इस मामले पर सुनवाई नहीं करने जा रही है। तब कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वो कंपनी की सील खोलने और कंपनी में प्रवेश देने की इजाजत की मांग करने वाली याचिका पर जल्द फैसला करें।
इस मामले पर एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एक कमेटी का गठन किया था। एनजीटी ने कंपनी पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था और उसे विशाखापतनम के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के यहां जमा करने को कहा था। एनजीटी के इस आदेश पर पिछले 26 मई को सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। एलजी पालीमर्स इंडस्ट्री से पिछली 7 मई को स्टाइरीन गैस लीक होने से आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में आनेवाले गांवों के लोगों पर असर पड़ा था। इसमें कुछ लोगों की मौत हो गई थी और काफी लोग बीमार हो गए थे।