मेरठ में लाॅकडाउन खुलने के बाद भी बाजार खोलने के नियम जिला प्रशासन ने बहुत कड़े कर दिए हैं। ऐसे में व्यापारी संगठन और जिला प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। व्यापारियों ने प्रशासन पर मनमानी करने का आरोप लगाया तो जिला प्रशासन ने कोरोना को रोकने के लिए सख्ती जरूरी बताई है।
मेरठ में कोरोना संक्रमण के कारण पाॅजिटिव केसों की संख्या 502 तक पहुंच गई है। इनमें से 33 लोगों की मौत हो चुकी हैं तो 371 लोगा स्वस्थ होकर अपन घर जा चुके हैं। मेरठ में अब केवल 98 सक्रिय केस रह गए हैं। अनलाॅक-1 शुरू होने के बाद भी जिला प्रशासन बाजार खुलवाने से बच रहा था। मेरठ के व्यापारी संगठन और जनप्रतिनिधि लगातार जिला प्रशासन पर बाजार खुलवाने का दबाव बनाए हुए थे। पहले आयुक्त अनीता सी मेश्राम ने आठ जून के बाद ही बाजार खोलने का ऐलान कर दिया, लेकिन डीएम अनिल ढींगरा ने पांच जून की आधी रात को शनिवार से बाजार खोलने की नियमावली जारी कर दी। बाजार खोलने की शर्तों को इतना कड़ा कर दिया कि मेरठ के प्रमुख बाजार नहीं खुल जाए। इसके अलावा शहर के प्रमुख मार्गों पर स्थित बाजार भी बंद रहे। मेरठ के प्रमुख बाजारों में शामिल आबूलेन, सदर बाजार, सुभाष बाजार, सूरजकुंड खेल मार्किट, बुढ़ाना गेट, बांबे बाजार, सोती गंज, कबाड़ी बाजार, लालकुर्ती पैठ आदि बाजार को हाॅस्पाॅट, कंटेनमेंट जोन और बफर जोन में वर्गीकृत करके सख्ती कर दी। गढ़ रोड की दुकानों को भी नहीं खुलने दिया गया।