आजाद सिपाही संवाददाता
लॉकडाउन से भुखमरी की कगार पर पहुंचे कई परिवारों के किस्से आपने सुने पढ़े होंगे। लेकिन यूपी के अलीगढ़ के नागला मंदिर क्षेत्र का रहने वाला एक छह सदस्यीय परिवार 15 दिन से घर में भूख से तड़पता मिला। रोटी का महत्व अगर आपको समझना है तो तीन साल पहले पिता की मौत से टूटा ये परिवार महामारी की वजह से लॉकडाउन में घर में लॉक भी हो गया और धीरे-धीरे डाउन भी हो गया।
पति की मौत से बेसहारा हुई गुड्डी देवी पांच बच्चों की मां हैं। कोरोना काल से पहले अलीगढ़ की एक फैक्टरी में ताला बनाने का काम करती थीं, उसे क्या पता था कि ये लॉकडाउन उसके परिवार की जिंदगी की तालाबंदी ही कर देगी। नौकरी छूट गई, बेरोजगार हो गई, और दाने-दाने की मोहताज हो गई।
पूरा परिवार 15 दिन से घर में पानी के सहारे जिंदा था। रोटी का कोई इंतजाम नहीं। खुद्दारी ऐसी कि आसपास पड़ोस के लोगों से मदद के सहारे परिवार कुछ दिन चला, लेकिन आखिर कब तक रोज-रोज भीख मांगने से मां को शर्म भी आने लगी। इस पूरी दास्तां की कहानी का सबसे दर्दनाक और शर्मनाक पहलू ये है कि सरकार के किसी विभाग ने इनकी कोई सुध नहीं ली।
गुड्डी के बच्चों ने दुख भरे दिनों के दर्द को अपने घर की दीवारों पर उकेर कर दर्द का इजहार किया। इस परिवार के पड़ोस में रहने वाली उर्मिला देवी बताती हैं कि पहले घर से महिला के रोने की और बच्चों की मां को दिलासा दिलाने जैसी आवाजें सुनाई पड़ती थीं। बच्चे फिर भी भूख से लड़ रहे थे पर मां आखिर भूखे बच्चों के दर्द को कैसे सह पाती।