सुनील कुमार
लातेहार। अभिजीत ग्रुप ने चंदवा प्रखंड के बाना गांव में पावर प्लांट स्थापित करने के लिए पहले फेज में विभिन्न बैंकों से 2175 करोड़ रुपये का लोन लिया था। जानकारों का कहना है कि पहले फेज का काम पूर्ण होने के पहले ही अभिजीत ग्रुप के मालिकों ने फेज दो के लिए भी 2387 करोड़ रुपये का लोन ले लिया। इस लोन के लिए प्रमोटरों ने कुटिल चाल चली। खेला। लोन के इस खेल में अभिजीत ग्रुप के प्रमोटरों ने ग्रामीणों से ली गयी भूमि और भू -अर्जन से प्राप्त सरकारी भूमि के पट्टे को बैंकों के पास गिरवी रख कर उक्त लोन पास करवा लिया। जानकारों का कहना है कि इतना बड़ा लोन देने समय बैंकों ने भी यह नहीं देखा कि आखिर उस पैसे की रिकवरी कैसे होगी। अगर कारखाना फुल फ्लेज में चालू भी हो गया होता और लाभ कमाने लगता, फिर भी उस पैसे की रिकवरी बीस साल में भी नहीं होती। लाभ से ज्यादा राशि का निवेश बैंकों ने कर दिया था।
इन बैंकों और वित्तीय संस्थानों को लगा चूना
अभिजीत ग्रुप के प्रमोटर मनोज जयसवाल एवं अभिषेक जयसवाल ने भूमि के पट्टे को बतौर बैंक गारंटी रख कर दूसरे फेज में एसबीआइ से 1601 करोड़ 55 लाख, एसबीएच से 55 करोड़ 45 लाख, एसबीओपी से 60 करोड़, एसबीटी से 60 करोड़, एसबीबीजे से 60 करोड़, भारतीय जीवन बीमा निगम से 150 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक से दो सौ करोड़ एवं आइआइएफसीएल से दो सौ करोड़ कुल 2387 करोड़ रुपये का लोन पावर प्लांट के प्रथम फेज में लगे संयंत्रों एवं भूमि के पट्टों को बतौर गिरवी रखकर प्राप्त किया।
बताया जाता है कि प्रमोटरों ने एक सुनियोजित तरीके से विभिन्न बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से लोन स्वीकृत कराया। हालांकि इस पावर प्लांट के चालू होने में महज कुछ दिन शेष था, यदि कंपनी चाहती तो इस प्लांट को बगैर कोयले के आवंटन के भी कमिशनिंग कर सकती थी। जानकार यह भी कहते हैं कि जल्दी कमिशनिंग हो जाती तो कोयले का भी प्रबंध हो जाता। वैसे भी भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि कोयले की बिडिंग में वही कंपनियां भाग लेंगी, जो कोयले की खपत खुद करने को तत्पर हों।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
झारखंड सरकार के पूर्व चीफ इंजीनियर उमेश्वर प्रसाद सिंह इस संदर्भ में कहते हैं कि कंपनी ने जितनी तत्परता और तन्मयता से इस प्लांट को लगाने का कार्य किया, यदि थोड़ी मेहनत और की होती तो प्लांट बिजली उत्पादन के क्षेत्र में झारखंड राज्य का अग्रणी पावर प्लांटों में शुमार होता। सिंह ने कहा कि इस प्लांट को पूरा नहीं करने में अभिजीत ग्रुप इच्छाशक्ति नहीं दिखायी। उनका कहना है कि यदि कंपनी चाहती तो कमिशनिंग करने के बाद दूसरी कंपनियों को बेच देती, तो यहां के हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता और झारखंड बिजली उत्पादन के क्षेत्र में शायदअग्रणी राज्य बन जाता।