झारखंड में कोरोना का संक्रमण खतरनाक रूप से बढ़ रहा है और अब यह खूबसूरत प्रदेश इस खतरनाक वायरस के चंगुल में बुरी तरह जकड़ता नजर आ रहा है। पिछले साढ़े तीन महीने की कवायद लोगों की लापरवाही के कारण विफल होती दिख रही है। सरकार, मुख्यमंत्री, प्रशासन और चिकित्सकों-विशेषज्ञों की बार-बार की चेतावनी के बावजूद झारखंड के लोग अब भी कोरोना से बेपरवाह नजर आ रहे हैं और दूसरी तरफ मंत्री-विधायक से लेकर अधिकारी-पुलिसकर्मी और फुटपाथ पर दुकान लगानेवाले तक संक्रमित हो रहे हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से कोरोना के सामुदायिक संक्रमण के स्तर तक पहुंचने की घोषणा नहीं की गयी है, लेकिन राज्य के लोगों की लापरवाही के कारण हमारा प्रदेश जल्दी ही उस दौर में पहुंच जाये, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। यह लापरवाही का परिणाम ही है कि राज्य सरकार के दफ्तरों को एक-एक कर बंद किया जा रहा है और मुख्यमंत्री तक को होम क्वारेंटाइन में जाना पड़ा है। राज्य में वैसे तो लॉकडाउन 31 जुलाई तक जारी है, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। झारखंड को इस खतरनाक स्थिति से बाहर निकालना यहां के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। इसलिए अब केवल सतर्कता से काम नहीं चलनेवाला। अब सख्ती जरूरी हो गयी है, क्योंकि बिना इसके लोग अलर्ट मोड में नहीं आयेंगे। झारखंड में कोरोना की खतरनाक स्थिति पर आजाद सिपाही ब्यूरो की खास रिपोर्ट।

आठ जुलाई की सुबह जब मीडिया में राज्य के एक मंत्री और एक विधायक के कोरोना संक्रमित पाये जाने की खबर छपी, तो मुहल्लों के नुक्कड़ों पर लोगों की प्रतिक्रिया बेहद निराशाजनक थी। लोग कह रहे थे कि यह बड़े लोगों की बीमारी है। हमें यह संक्रमण नहीं छू सकता। दिन चढ़ते-चढ़ते सड़कों पर वाहनों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों की आम-दरफ्त से साफ लग रहा था कि लोगों को न तो इस खतरनाक वायरस की चिंता है और न संक्रमण फैलने की। 31 मार्च को जब झारखंड में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आया था, तब से लेकर आज तक लगातार इस खतरनाक वायरस के प्रति आम लोगों की इसी लापरवाही ने आज स्थिति को खतरनाक मोड़ पर पहुंचा दिया है। लॉकडाउन के तीन चरणों के बाद दी गयी छूट का झारखंड में इतना दुरुपयोग किया गया कि आज राज्य सरकार के मंत्री और विधायक तक कोरोना से संक्रमित हो गये हैं। जेल और थानों तक में संक्रमण फैल चुका है। मुख्यमंत्री, उनके प्रधान सचिव और सीएम आवास पर तैनात अन्य अधिकारियों-कर्मियों को होम क्वारेंटाइन में जाना पड़ा है। राज्य सरकार के दफ्तरों को एक-एक कर बंद किया जा रहा है। पुलिसकर्मियों में भी संक्रमण फैल रहा है। झारखंड के लिए यह बेहद खतरनाक स्थिति है। राज्य में संक्रमितों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उससे लगता नहीं कि हमारा यह खूबसूरत प्रदेश बहुत दिनों तक कोरोना के चंगुल से बच सकेगा। राज्य को इस संकट से बचाने का अब एक ही विकल्प है। सरकार और प्रशासन के लिए यह विकल्प थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन अब इसके अलावा दूसरा रास्ता बचा भी नहीं है। यह विकल्प है सख्ती का।
राज्य सरकार ने झारखंड में लॉकडाउन की अवधि 31 जुलाई तक बढ़ायी तो है, लेकिन इसका कोई असर लोगों पर पड़ता नहीं दिख रहा है। शहरों और गांवों में जनजीवन पूरी तरह सामान्य है और लोग अपनी मर्जी के अनुसार आवागमन कर रहे हैं। न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है और न ही मास्क-ग्लब्स का इस्तेमाल ही किया जा रहा है। झारखंड को कोरोना से बचाने के लिए अब इन उपायों को सख्ती से लागू करना जरूरी हो गया है।
कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए अब हर आम और खास को आगे आना होगा। प्रशासन ने सामाजिक-धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए वैंक्वेट हॉल और सभागारों की बुकिंग रद्द तो कर दी है, लेकिन घरों में जो आयोजन हो रहे हैं, उन पर कैसे रोक लगायी जाये, इस पर भी विचार करना होगा। बर्थ डे, गृह प्रवेश, पूजा, शादी और दूसरे सामाजिक आयोजनों से फिलहाल तौबा करना ही सुरक्षित रहेगा, यह हर व्यक्ति को समझना होगा। खास कर बड़े लोगों को इसमें आगे आना होगा, क्योंकि उनके लिए क्वारेंटाइन होना आसान है, लेकिन दो या तीन कमरों में रहनेवाले आम लोगों के लिए घर में अलग रहना काफी मुश्किल होगा, यह बात समझनी होगी।
कोरोना का संक्रमण कितने खतरनाक ढंग से फैलता है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और कोलकाता की स्थिति देख कर मिल जाता है। सरकार और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद संक्रमण फैलने की गति कम नहीं हो रही है। यह उन महानगरों की स्थिति है, जहां बड़े-बड़े अस्पताल हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद अच्छी है। झारखंड के लोगों को यह भी समझना होगा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। अस्पतालों और जरूरी उपकरणों की कमी से झारखंड जूझ रहा है। ऐसे में यदि स्वास्थ्य सेवाओं पर अत्यधिक बोझ डाला गया, तो उसका विपरीत असर हो सकता है। इसलिए लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। सरकार और प्रशासन अपनी पूरी क्षमता से इस जंग को लड़ रहा है और झारखंड को कोरोना से बचाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन इसमें सफलता तभी मिल सकती है, जब लोग सतर्क होंगे, संक्रमण के प्रति चिंतित होंगे। सब कुछ सरकार और प्रशासन के भरोसे छोड़ना कहीं से भी अच्छा नहीं हो सकता। यदि लोग अपने स्वास्थ्य की चिंता नहीं करेंगे, तो फिर उन्हें कोई नहीं बचा सकता।
इसलिए अब भी वक्त है। कोरोना के खतरनाक वायरस ने झारखंड को अपनी चपेट में ले लिया है। लोगों की जरा सी लापरवाही इस राज्य को बड़ी तबाही के कगार पर लाकर खड़ा कर सकती है। इस आसन्न संकट को टालने के लिए आत्मसंयम और संकल्प बेहद जरूरी है। चूंकि कोरोना की कोई दवा अब तक नहीं विकसित हुई है, इसलिए इससे बचाव ही इसके रोकथाम का एकमात्र उपाय है। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क-ग्लब्स-सेनेटाइजर का अनिवार्य इस्तेमाल करना लोगों की आदत में शुमार हो जाये और लोग बेवजह बाहर निकलने से परहेज करने लगें, तो इस संक्रमण को पराजित किया जा सकता है। अन्यथा राज्य की पूरी व्यवस्था ही थम जायेगी, जिसकी इतनी बड़ी कीमत लोगों को चुकानी होगी, जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।

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