रांची। कांग्रेस की महगामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। यह पत्र उन्होंने शिक्षा का साम्प्रदायिकरण करने का प्रयास करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठन करने के सम्बन्ध में लिखा है।

दीपिका ने पत्र में लिखा है कि विगत दिनों कोल्हान प्रमंडल के एक सरकारी एवं दो असम्बद्ध संस्कृत विद्यालयों से सम्बंधित चौंका देने वाली चिंताजनक खबरें देखने को मिली है। झारखण्ड एकेडमिक कॉउन्सिल (जैक) के एक पदाधिकारी के कथित मौखिक आदेश के आलोक में विद्यालय प्रबन्धन ने अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों का मध्यमा परीक्षा के लिए निबंधन, नामांकन पर तत्कालीन रोक लगा दिया था, जिसके कारण अल्पसंख्यक छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

समाचार पत्रों में उक्त तीनों स्कूल के प्रिंसिपल का बयान छपा है कि उन्होंने जैक के दसवीं कक्षा सह-कोऑर्डिनेटर कौशल मिश्रा के मौखिक आदेश के आलोक में मुस्लिम छात्रों का निबन्धन रोक दिया था। कौशल मिश्रा ने अपना पक्ष रखते हुए इस अमर्यादित, गैरकानूनी, असंवैधानिक और साम्प्रदायिक कदम को यह कहते हुए सही ठहराया है कि चूंकि मुस्लिम बच्चे वेद नहीं पढ़ते। इसलिए संस्कृत स्कूल में उनका नामांकन नहीं किया जा सकता है। झारखण्ड में ऐसा पहली बार हुआ है जब धर्म और भाषा के आधार पर संस्कृत विद्यालयों में मुस्लिम छात्रों के नामांकन निषेध कर दिया गया जो की बेहद आपत्तिजनक है। यह तो संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन तो है ही। यह कृत्य संविधान प्रदत्त ”शिक्षा एक मौलिक अधिकार” के विरुद्ध है। अब मामला प्रकाश में आने पर आननफानन में शिक्षा विभाग ने उक्त तीनों स्कूल के प्रिंसिपल के विरुद्ध निलंबन, कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि जैक के उक्त पदाधिकारी के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की गयी है। यह जैक और उसके पदाधिकारियों के द्वारा शिक्षा के साम्प्रदायिकरण का घृणित प्रयास है, जिसे हलके से नहीं लिया जा सकता है।

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