नई दिल्ली। मणिपुर में हिंसा पर विपक्षी दलों के सांसदों के हंगामे के बीच, मंगलवार को जैविक विविधता (संशोधन) विधेयक, 2022 लोकसभा से पारित हो गया। इस विधेयक से जैविक घटकों के सतत उपयोग और कमजोर समुदायों के साथ लाभों के उचित एवं न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित किया जा सकेगा।
सदन द्वारा विधेयक पारित होने से पहले लोकसभा में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि इस समय दुनिया तीन तरफ से जलवायु संकट का सामना कर रही है। इसमें जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण और जैविक संसाधनों का नुकसान शामिल है। जैविक विविधता अधिनियम से जैविक घटकों के सतत उपयोग और कमजोर समुदायों के साथ न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक से जैविक घटकों के व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देना चाहते हैं। आयुष मंत्रालय द्वारा जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। हम इस क्षेत्र में अनुसंधान, सहयोग और नवाचार चाहते हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इज ऑफ डूइंग बिजनेस यानि व्यापार करने और जीवनयापन में आसानी को बढ़ावा देना चाहती हैं। इस दिशा में आगे बढ़ाने का काम इस विधेयक द्वारा किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में जैविक विविधता अधिनियम (2002) में संशोधन का प्रस्ताव रखा, तो देश के जैव विविधता संसाधनों के बढ़ते शोषण के लिए इसकी आलोचना की गई। इसके बाद सरकार इस विधेयक को आगे के विचार-विमर्श के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास विचार के लिए भेज दिया गया था। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसे संसद के पटल पर रखा गया। भारी हंगामे के बीच इसे ध्वनिमत से पारित घोषित किया गया ।