रांची: मुख्यमंत्री रघुवर दास ने विधानसभा में गुरुवार को साफ कहा कि सीएनटी-एसपीटी विधेयक मर गया है। विधेयक खत्म हो गया है। इसे लेकर हाय-तौबा मचाने की जरूरत नहीं है। हंगामे पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने विपक्ष पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष और राष्ट्रविरोधी शक्तियों ने इसे लेकर कंफ्यूजन पैदा कर गलत संदेश दिया है। मैं सदन के अंदर और बाहर चुनौती देता हूं कि किसी उद्योगपति को एक इंच जमीन देने की बात इस संशोधन में नहीं है। उद्योगपतियों को जमीन देने के लिए 1996 में संशोधन किया गया था। यह रास्ता उस वक्त झामुमो ने खोला था। सरकार में झामुमो भी था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन नहीं चलने की चिंता से वह सहमत हैं। राज्य की सवा तीन करोड़ जनता की आशा का केंद्र विधानसभा है। राज्य की सबसे बड़ी पंचायत विधानसभा में जनता की समस्याओं का हल निकाला जाता है। पिछले दो-तीन सेशन से लोकतंत्र की हत्या हो रही है। सरकार भी सदन को चलाने के लिए चिंतित है। सीएनटी-एसपीटी में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया था। सरकार लोगों के हित के लिए ऐसा कर रही थी। सरकार इस बात पर आज भी अडिग है। सदन से प्रस्ताव पास करा कर विधानसभा के माध्यम से राजभवन भेजा गया था। राज्यपाल से मिल कर कई संगठनों ने आपत्ति जतायी। इसके बाद इस विधेयक को विचार के लिए राज्यपाल ने लौटाया है। राज्यपाल के पद की गरिमा है। अगर इसमें संशोधन की बात होती, तब चर्चा जायज थी।
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि टीएसी की बैठक में सदस्यों ने अपनी राय रखी। सुझाव भी आये। इस कारण सरकार ने इस विधेयक को खत्म करने का निर्णय लिया है। अब यह विधेयक मर गया है।

नेता प्रतिपक्ष में सुनने की क्षमता नहीं 
मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष में सुनने की क्षमता नहीं है। जब सरकार जवाब दे रही हो, तो उन्हें सुनने की क्षमता होनी चाहिए।

झामुमो ने बेच दिया था झारखंड
नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने कहा कि झामुमो ने झारखंड को बेचने का काम किया है। चंद रुपये की लालच में झारखंड को बेच दिया था। तभी बिरंची नारायण ने कहा कि झामुमो झारखंड विरोधी है। राष्टÑविरोधी है। झारखंड की आवाज को नरसिम्हा सरकार के समय झारखंड को बेच दिया था।

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