नई दिल्ली. भारत और चीन ने एक-दूसरे के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और चीन के रक्षा मंत्री वेंग फेंघ के बीच गुरुवार को यहां दो घंटे तक चली मुलाकात में यह फैसला किया गया। डोकलाम विवाद के बाद दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की यह पहली द्विपक्षीय बातचीत थी। दोनों देशों ने डोकलाम जैसे टकराव से बचने के लिए सेना के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू करने पर सहमति जताई। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित हॉटलाइन सेवा भी जल्द शुरू करने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और अन्य पेशेवर बातचीत और संबंधों का विस्तार करने का फैसला किया गया। दोनों पक्षों ने रक्षा आदान-प्रदान और सहयोग पर 2006 में हुए समझौते की जगह एक नया द्विपक्षीय समझौता करने का भी निर्णय लिया।
जिनपिंग-मोदी के फैसलों को लागू करना मकसद : बताया गया है कि इस मुलाकात का मुख्य मकसद चीन के वुहान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई अनौपचारिक मुलाकात में किए गए फैसलों को लागू करना था। भारतीय-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच 16 जून 2016 से 28 अगस्त 2016 तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। बाद में अगस्त में यह टकराव खत्म हुआ और दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी।
डोकलाम विवाद के बाद पहली बार मिले भारत-चीन के रक्षा मंत्री
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