रांची। बिजली सब्सिडी को सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खाते में हस्तांतरित करने वाला झारखंड देश का पहला राज्य होगा. केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग और फोरम अॉफ रेगुलेटर्स की बैठक में इस पर खासतौर पर चर्चा की गयी. होटल बीएनआर में आयोजित बैठक में झारखंड को बिजली सब्सिडी का मॉडल राज्य बनाने पर सहमति बनी. कहा गया कि यहां मॉडल सफल होने पर अन्य राज्यों में भी इसे लागू किया जायेगा. बैठक का उदघाटन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने किया. फोरम अॉफ रेगुलेटर की बैठक में कहा गया कि पहले चरण में सरकार निजी कंपनियों जुस्को, टीएसएल, डीवीसी, सेल बोकारो के उपभोक्ताओं को भी सब्सिडी देने का प्रस्ताव है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सरकार से यह आग्रह भी किया है कि बिजली वितरण निगम के उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी निजी कंपनियों के घरेलू उपभोक्ताओं को दिया जाये.
अब सरकार पहले चरण में निजी कंपनियों के उपभोक्ताओं को डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी देगी. इसके बाद एक वर्ष के अंदर ही बिजली वितरण निगम के उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी जायेगी. गौरतलब है कि राज्य सरकार इस समय बढ़े हुए टैरिफ पर 2000 करोड़ रुपये सब्सिडी बिजली वितरण निगम को देती है. इसके एवज में वितरण निगम बढ़ी हुई टैरिफ में सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी को घटा कर बिल का भुगतान लेता है. मार्च 2019 तक इन उपभोक्ताओं को भी पूरे बिल का भुगतान करना होगा और एलपीजी गैस की तरह सब्सिडी की राशि उनके खाते में जायेगी.
बैठक में ये लोग थे मौजूद : बैठक में केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग व फोरम ऑफ रेग्यूलेटर्स के अध्यक्ष पी के पुजारी, गुजरात के अध्यक्ष आनंद कुमार, फोरम ऑफ रेग्यूलेटर्स के सचिव सनोज कुमा झा, जेएसईआरसी के सचिव एके मेहता, सदस्य तकनीक आरएन सिंह समेत देश के सभी राज्यों के नियामक आयोग के अध्यक्ष व अन्य वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे.
पहले राज्य में एटी एंड सी लॉस 40% था, जो अब घटकर 30% हो गया है, इसे 15% पर लाने का लक्ष्य रखा गया है
पहले चरण में निजी बिजली कंपनियों के घरेलू उपभोक्ताओं को डीबीटी से सब्सिडी दी जायेगी
एक वर्ष के अंदर ही झारखंड बिजली वितरण निगम के उपभोक्ताओं को दी जायेगी सब्सिडी
बैठक में इन बिंदुओं पर की गयी चर्चा
नेट मीटरिंग में सुधार पर विस्तार से चर्चा की गयी. कहा गया कि इससे सौर ऊर्जा के रूफ टॉप प्लांट लगाने वाले अपनी बिजली बेच भी सकेंगे.
परंपरागत की जगह नवीकरणीय और सौर ऊर्जा की खपत बढ़ाने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर.
उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली देने के लिए बनेगा कानून बनाने पर सहमति बनी है. कहा गया कि इसमें निर्धारित वोल्टेज से कम वोल्टेज की बिजली देने पर उपभोक्ता मुआवजा के हकदार होंगे.
ओपन एक्सेस सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए दूसरे राज्यों से सस्ती दर पर बिजली खरीदने की छूट दी जायेगी. वहीं, औद्योगिक उपभोक्ताओं को पास दूसरी कंपनियों से भी बिजली खरीदने की छूट होगी.
वर्ष 2022 तक झारखंड में 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन का रखा गया है लक्ष्य : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि 2022 तक झारखंड में 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. झारखंड दूसरे राज्यों की बिजली की जरूरत पूरा कर सकेगा. पिछले चार वर्षों में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए पतरातू थर्मल पावर और एनटीपीसी के साथ संयुक्त उपक्रम तैयार किया गया है. यहां 2022 तक 800-800 मेगावाट के पांच यूनिट स्थापित की जायेंगी. यहां उत्पादित 85 प्रतिशत बिजली झारखंड को मिलेगी. तेनुघाट का विस्तार भी किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि राज्य में अगले दो वर्षों ग्रिड सब-स्टेशनों की संख्या चार गुनी बढ़ा दी जायेगी. संताल परगना और डालटनगंज और लातेहार को सेंट्रल झारखंड से जोड़ दिया गया है. इससे इन क्षेत्रों में बिजली संकट का दौर खत्म हो गया है. शहरों में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अंडर ग्राउंड केबलिंग का काम प्रगति पर है. पावर सब स्टेशन की संख्या बढ़ायी जा रही है. नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. राज्य का एटीएंडसी लॉस 40 से घटाकर 30 प्रतिशत रह गया है. इसे 15 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है. रांची स्मार्ट ग्रिड पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है.
चार साल में 38 लाख परिवारों में से 19 लाख परिवारों तक पहुंचा दी गयी है बिजली
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में बिना बिजली के रह रहे 38 लाख परिवारों में से 19 लाख परिवारों तक पिछले चार साल में बिजली पहुंचा दी गयी है. शेष घरों में दिसंबर तक बिजली पहुंचा दी जायेगी. बिजली आने के साथ ही लोगों के जीवन में गुणात्मक सुधार आयेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि भरपूर संभावनाओं के बाद भी झारखंड में आधारभूत संरचना पर ठीक से काम नहीं होने के कारण बिजली की क्षेत्र में हम पीछे हैं. राजनीतिक अस्थिरता की वजह से ऐसा हुआ है. पर वर्ष 2014 से राज्य में स्थिर सरकार है और तेजी से आधारभूत संरचना पर काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य में आयोग के सहयोग से टैरिफ आर्डर सरलीकृत किया गया है. अब सरकार ग्रांट ने देकर सीधे उपभोक्ताओं को बिजली की दर में सब्सिडी प्रदान कर रही है.
जेबीवीएनएल के उपभोक्ताओं को भी डीबीटी से मिलेगी सब्सिडी, शुरुआत दूसरी कंपनियों से
झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविंद प्रसाद ने कहा कि जुस्को, टीएसएल आदि कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का पूरा रिकॉर्ड है. इसलिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर डीबीटी की शुरुआत इन कंपनियों के उपभोक्ताओं से की जा सकती है. आगे चलकर झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के उपभोक्ताओं को भी सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से दी जायेगी.