रांची. झारखंड ऊर्जा विकास निगम ने जमशेदपुर एरिया बोर्ड के इंजीनियरों को चिन्हित कर उन पर कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। ये इंजीनियर रिले सिस्टम में छेड़छाड़ कर बिजली की चोरी कराने के दोषी पाए गए हैं। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में पांच कंपनियों द्वारा करीब 26 करोड़ की बिजली चोरी की पुष्टि की है। एसआईटी ने कहा है कि रिले सिस्टम में जरूरत के अनुरूप बिजली के फ्लो को बढ़ा कर यह चोरी की जाती थी। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद निगम ने ऊर्जा विभाग के माध्यम से इन इंजीनियरों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए प्रस्ताव मुख्यमंत्री रघुवर दास को भेज दिया था। इस पर मुख्यमंत्री ने भी अपनी स्वीकृति दे दी है।

रिले सिस्टम में फ्लो बढ़ाकर होती थी बिजली की चोरी : पावर सब स्टेशन के कंट्रोल पैनल के ब्रेकर में बिजली आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए रिले सिस्टम नामक इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट लगता है। रिले सिस्टम में किसी फीडर को दी जानेवाली बिजली की मात्रा को निर्धारित किया जाता है। अर्थात किसी फीडर को 60 मेगावाट की जरूरत है तो रिले सिस्टम के बटन को इस तरह फिक्स किया जाता है कि वहां से 60 मेगावाट से अधिक की बिजली आपूर्ति होते ही वह ट्रिप कर जाएगा। बिजली की आपूर्ति बंद हो जाएगी। लेकिन अभियंताओं ने 60 मेगावाट की जरूरत को बढ़ा कर 78, 78 मेगावाट की जरूरत को बढ़ा कर 90 और 120 मेगावाट तक बढ़ा दिया। इस तरह बिजली की चोरी की जाती रही।

तीन फीडरों से चोरी, 5 कंपनियां शामिल : जमशेदपर एरिया बोर्ड के तीन फीडरों से यह चोरी की जा रही थी। इनमें मेसर्स नानक इस्पात, मेसर्स नरेडी, मेसर्स कामसा इंडस्ट्री, मां तारा और एक अन्य कंपनी शामिल है। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में एक जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2017 तक जमशेदपुर एरिया बोर्ड के तीन फीडरों से जुड़े अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई का आदेश दिया है।

बिजली चोरी रोकने को 14 जिलों में छापे : ऊर्जा विकास निगम की एटीपी टीम ने सोमवार को रांची सहित 14 जिलों में बिजली चोरी के खिलाफ अभियान चलाया। 1731 जगह छापेमारी की। 396 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और 57.99 लाख रु. का जुर्माना ठोंका। सिर्फ रांची में 517 जगह छापेमारी कर 76 लोगों पर केस दर्ज कराया गया और 10.46 लाख जुर्माना लगाया गया।

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