दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन पैथोलॉजी लैब पर रोक लगाने की मांग पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और आईसीएमआर को निर्देश दिया है कि ऐसी ऑनलाइन लैब्स के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करें। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई सुनवाई के बाद कहा कि अवैध पैथोलॉजी लैब्स पर जल्द से जल्द कार्रवाई करें और पैथोलॉजी लैब्स को भी अपना पक्ष रखने का मौका दें।
जयपुर के पैथोलॉजिस्ट रोहित जैन ने दायर याचिका में कहा था कि आनलाइन पैथोलॉजी लैब्स की ओर से लोगों के खून का सैंपल लेना लोगों की जान को खतरा में डाल सकता है, क्योंकि इन लैब्स की कोई प्रामाणिकता नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील शशांक सुधी देव ने याचिका में कहा था कि ये आनलाइन पैथोलॉजिकल लैब्स बिना किसी अनुमति के चल रहे हैं। याचिका में कहा गया था कि आनलाइन पैथोलॉजी लैब क्लीनिकल एस्टैबलिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्टर्ड नहीं किए गए हैं। इसलिए मरीजों का सैंपल लेने के लिए वे मेडिको लीगल रूप से उतरदायी नहीं हैं। याचिका में आनलाइन एग्रीगेटर के जरिये चलने वाले पैथोलॉजी लैब्स को बंद करने की मांग की गई थी।
आनलाइन पैथोलॉजी सर्विस के जरिये लोग अपनी सुविधा के मुताबिक सैंपल देने के लिए बुकिंग करवाते हैं। याचिका में कहा गया था कि इन लैब्स के संचालकों के क्वालिफिकेशन का वेरिफिकेशन भी नहीं किया गया है। ये आनलाइन पैथोलॉजी लैब्स इंडियन काउंसिल ऑफ रिसर्च (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए कोरोना का अनाधिकृत रुप से टेस्ट कर रहे हैं। ऐसा करना संविधान की धारा 21 के तहत जीने के अधिकार का उल्लंघन है।
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