सुप्रीम कोर्ट ने मोरेटोरियममामले पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की जमकर खिंचाई की है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मोरेटोरियम अवधि के दौरान टाली गई EMI पर ब्याज नहीं लेने की मांग पर कोई स्टैंड न लेने के चलते सरकार की खिंचाई की है. कोर्ट ने कहा है कि सरकार लोगों की तकलीफ को दरकिनार कर सिर्फ व्यापारिक नज़रिए से नहीं सोच सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार रिजर्व बैंक (RBI) को जल्द फैसला लेने के लिए कहा है. मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2020 को है.
सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस मामले पर कर चुका है खिंचाई
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी इसी मसले पर केंद्र सरकार की खिंचाई कर चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने जून में सुनवाई के दौरान कहा था कि केंद्र अब इसे ग्राहकों बैंक के बीच का मसला बताकर अपना पल्ला झाड़ नहीं सकता है. सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों को इसका फायदा मिले. आपने अदालत से समय लेने के बावजूद कुछ नहीं किया. ग्राहकों को पता है कि इस स्कीम से उन्हे लाभ नहीं मिल रहा, लिहाजा वो इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.
बता दें कि पंजाब नेशनल बैंकने सोमवार को कहा था कि अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित 31 अगस्त तक कर्ज चुकाने की मोहलत को बढ़ाया नहीं जाना चाहिए. पीएनबी के प्रबंध निदेशक सीईओ एस एस मल्लिकार्जुन राव का कहना है कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी देखने को मिल रही है. बता दें कि एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन दीपक पारेख, एसबीआई (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार सीआईआई के अध्यक्ष उमेश कोटक जैसे प्रमुख बैंकर हाल ही में ऐसे विचार व्यक्त कर चुके हैं.
गौरतलब है कि आरबीआई ने शुरुआत में इसे मई को खत्म हो रही तीन महीने की अवधि के लिए अनुमति दी थी, लेकिन बाद में इसे अगस्त तक बढ़ा दिया था. राव ने कहा कि पीएनबी की 30,000 करोड़ रुपये की लोन बुक में से सिर्फ 20 से 22 फीसदी खाताधारकों ने आरबीआई की मोरोटोरियम स्कीम के विकल्प को नहीं चुना है