रांची। साल 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड एक दूसरा राज्य बना। दोनों राज्यों को अलग हुए दो दशक से अधिक समय बीत गया है। लेकिन कुछ भाषा, कुछ पहनावा तो कुछ खानपान आज भी दोनों का एक है। दोनों सूबों की राजनीति भी लगभग एक ही है और उसकी मौजूदा कहानी भी एक जैसी है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं चंपाई सोरेन के बगावती सुर की। यह सुर कुछ साल पहले बिहार में भी सुनाई दिया था, जब नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता की चाभी जीतन राम मांझी को दी थी। जीतन राम मांझी अब खुद एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और केंद्रीय मंत्री भी हैं।
चंपाई को लग गया सीएम की कुर्सी का चस्का
झारखंड की सियासत में तब से भूचाल है, जब से ईडी लैंड स्कैम मामले में हेमंत सोरेन को जेल ले गई थी। हेमंत सोरेन ने जेल जाते हुए इस्तीफा दिया और चंपाई सोरेन को अपनी सीएम की कुर्सी सौंप दी और जैसे ही जेल से बाहर आए बिना किसी देर के उन्होंने चंपाई सोरेन से कुर्सी वापस ले ली। कुछ महीनों तक सीएम की कुर्सी पर सवार रहे चंपाई सोरेन को स्वाद लग गया है। स्वाद लग गया है सीएम पद की। ऐसी ही घटना बिहार में भी घटी थी। साल था 2014 और दिन था 20 मई। जब बिहार में सीएम की कुर्सी पर बैठे जीतन राम मांझी।
नीतीश की सोच से दो कदम आगे थे मांझी
मांझी को ये कुर्सी नीतीश ने खुद सौंपी थी। तब उन्हें नीतीश का सबसे भरोसेमंद माना जाता था। दरअसल, साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू की हार के बाद नीतीश ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जब नए नेता की तलाश शुरू हुई तो नीतीश कुमार की तलाश मांझी पर आकर खत्म हो गई। इस कदम से नीतीश कुमार अपने महादलित जनाधार को और मजबूत करना चाहते थे। नीतीश कुमार ने जिस सोच के साथ मांझी को सीएम बनाया था, उससे कहीं आगे निकल गए थे मांझी।
मांझी करीब 9 महीने तक मुख्यमंत्री रहे और 20 फरवरी 2015 को इस्तीफा दे दिया। इस दौरान बिहार में खूब उठापटक चली। यहां तक की जदयू को अपने विधायकों को लामबंद करके अपनी ताकत दिखानी पड़ी। इस 9 महीने में मांझी ने स्वतंत्र रूप से काम किया था। लेकिन जब सीएम की कुर्सी जाने लगी तो उन्होंने मोर्चा खोल दिया।
झारखंड के मांझी बनेंगे चंपाई सोरेन
मांझी की ही तरह अब चंपाई सोरेन नई पार्टी बनाने की तैयारी कर रहे हैं। चंपाई सोरेन ने कहा है कि वह राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे और नई पार्टी बनाएंगे। साथ ही उन्होंने गठबधंन के लिए भी दरवाजे खोल दिए हैं। चंपाई सोरेन ने कहा कि मैंने तीन विकल्प बताए थे, रिटायरमेंट, संगठन या दोस्त। मैं रिटायर नहीं होऊंगा। मैं पार्टी को मजबूत करूंगा, नई पार्टी बनाऊंगा।’ बता दें कि मांझी ने भी अपनी पार्टी बनाई, जिसका नाम उन्होंने रखा हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा। पार्टी बनाने के बाद मांझी नीतीश कुमार के साथ भी आए और अब तो यह है कि दोनों ही एनडीए के हिस्सा हैं और केंद्र की राजनीति में अपना दमखम दिखा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या चंपाई सोरेन झारखंड के मांझी साबित होंगे। क्योंकि अभी तक वो बिल्कुल उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए नजर आ रहे हैं।