झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फें्रस कर भाजपा पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करने में लगी है। पिछले दिनों सीएम हाउस से चुनाव आयोग को भाजपा की एक शिकायत पर स्पष्टीकरण भेजा गया था। यह एक गोपनीय दस्तावेज था। लेकिन गोड्डा सांसद ने इसे ट्विटर पर जारी कर दिया है जो अपराध है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सीएम हाउस से चुनाव आयोग को भेजा गया गोपनीय डॉक्यूमेंट प्राइवेट हाथों में कैसे गया, इसलिए झामुमो की मांग है कि चुनाव आयोग अपनी स्थिति को स्पष्ट करे और इसके लिए जिम्मेवार लोगों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करे।

सांसद के इशारे पर काम कर रहा आयोग
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य में भाजपा द्वारा जिस तरह का राजनीतिक प्रदूषण फैलाया जा रहा है यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। संवैधानिक संस्थाओं की सर्वोच्च प्राथमिक्ताओं में गोपनीयता काफी महत्वपूर्ण पहलू होती है। लेकिन कुछ लोगों ने इसे ताक पर रख दिया है। जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।

मुख्यमंत्री के कार्यालय के पत्र गोपनीयता की श्रेणी में आते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने आॅफिशियल डॉक्यूमेंट में आयोग को जो-जो बाते कही उसे 5 सितंबर को भाजपा सांसद ने आॅफिस आॅफ सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन करके सार्वजनिक कर दिया। जो चिंता का विषय है। 5 सितंबर को ही सदन में हेमंत सरकार ने विश्वास मत हासिल किया और इसी दिन यह पत्र लीक हो गया। ऐसे में आयोग पर कई सवाल खड़े होते है। लगता है कि आयोग गोपनीयता नहीं संभाल पा रहा और वह गोड्डा सांसद से पूछ कर हर काम करता है।

पांच दिन बाद भी राजभवन का नहीं मिला जवाब
पिछले दिनों यूपीए के लोग राजभवन गये। राज्यपाल ने आश्वाशन देते हुए कहा था कि दो दिनों के अंदर वह अपना मंतव्य वे आयोग को भेज देंगे। उस बात को आज पांच दिन हो गये, लेकिन अब तक कुछ नही हुआ। लगता इस बार भी सांसद ही बताएंगे कि आगे क्या होगा।

हेमंत के आगे भाजपा पस्त
पिछले कुछ समय से राज्य में यह सरकार को लेकर यह भ्रम फैलाया जा रहा था कि गठबंधन में एकता नही है। राज्य की जनता राज्य सरकार से असंतुष्ट है। इसलिए मुख्यमंत्री ने भाजपा द्वारा फैलाये जा रहे इस भ्रम को तोड़ने के लिए विधानसभा बुलाया और एकता का परिचय दिया। विपक्ष की ओर से हेंमत सरकार के सामने खड़े होने की हिम्मत किसी में नही थी कि वह मतदान करें। अगर विपक्ष की ओर से मतदान होता तो भाजपा के कई लोग हेमंत सरकार के पक्ष में ही मतदान करते तो आश्चर्य नही होता। इसलिये उन्होंने वाक आउट किया।
खतियान की पहचान, ओबीसी का आरक्षण, लोगों को सरकारी नौकरी, संविदा आधारित नौकरियों में सुधार, हर चेहरे पर खुशी, आदिवासी मूलवासी के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की विदेशों में पढाई, खेल और पर्यटन को रोजगार से जोड़ना सहित कई ऐसे काम हुए हैं, उससे लोगों में इस सरकार के लिये विशेष भाव जग गया है।

Share.

Comments are closed.

Exit mobile version