नयी दिल्ली: तनावपूर्ण और अनियमित जीवनशैली, बच्चों को स्तनपान नहीं करवाना, धूम्रपान और प्रदूषण महिलाओं में स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक देश में स्थिति पहले ही काफी खराब है।

भारत में हर साल स्तन कैंसर के एक लाख नए मामले सामने आ रहे हैं और चिकित्सकों का मानना है कि ‘‘बदलती जीवनशैली’’ और ‘‘कामकाज के तरीके’’ ऐसे ही रहे तो ये मामले और बढ़ेंगे।

सर गंगाराम अस्पताल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी में वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. श्याम अग्रवाल ने बताया, ‘‘शादी करने में देरी, जंक और डिब्बाबंद खान-पान और माताओं द्वारा बच्चों को पर्याप्त स्तनपान नहीं करवाना इस कैंसर की वजहों में शामिल है।’’ दिल्ली के अपोलो अस्पताल में कंसल्टेंट ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रमेश सरीन कहते हैं, ‘‘भारत में इसे लेकर हालात चिंताजनक हैं। देर से शादी करना या शादी नहीं करना, केवल एक बच्चे को जन्म देना, असक्रिय जीवनशैली, कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करना इसे और खराब बना देते हैं।’’ अक्तूबर को स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है।

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