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    कांग्रेस को हेमंत का नेतृत्व तो स्वीकार, पर सीटों को लेकर अब भी पेंच

    azad sipahi deskBy azad sipahi deskOctober 5, 2019No Comments7 Mins Read
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    सीटों को लेकर जिच बरकरार
    आज भले ही कांग्रेस और झामुमो एक मंच पर आते दिख रहे हों, पर सीटों लेकर दोनों दलों ही नहीं, बल्कि महागठबंधन के सभी दलों में जिच बरकरार है। हर दल सीटों को लेकर अपने-अपने दावे पेश कर रहा है। जानकारी के अनुसार पिछले दिनों हेमंत सोरेन के आवास पर कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह के साथ हुई मुलाकात के दौरान सोरेन ने स्पष्ट कर दिया कि झामुमो को 45 सीटें चाहिए। शेष 35 सीटों पर अन्य विपक्षी दल आपस में बंटवारा कर लें। जबकि कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उसे 25 सीटें चाहिए। झामुमो भी सीटिंग और सेकेंड पोजिशन की सीटों समेत 45 सीटें चाहता है। वहीं, कांग्रेस के साथ भी कुछ ऐसा ही है। उधर झाविमो, राजद और अन्य विपक्षी दल पूछ रहे हैं कि 35 सीटों में झामुमो छोड़ शेष विपक्ष के बीच बंटवारा कैसे होगा। इससे सीटों को लेकर स्थिति पूरी तरह से उलझ गयी है। जबकि पूरा विपक्ष यह समझ रहा है कि महागठबंधन के बिना भाजपा को पछाड़ना मुश्किल होगा। परंतु झामुमो की इस रूख को देखकर अन्य विपक्षी दल अभी से ही सतर्क हैं। सबसे ज्यादा पेंच कोल्हान की सीटों को लेकर ही दिख रहा है।
    हेमंत को चेहरा मानने के बदले में कांग्रेस चाहती है सीटें
    कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच समझौते की गाड़ी आगे बढ़ गयी है। कांग्रेस ने हेमंत सोरेन को विपक्ष और महागठबंधन का चेहरा जरूर मान लिया है, पर अब वह झामुमो से बड़े भाई की तरह थोड़ी दरियादिली की उम्मीद भी कर रही है। यानी सीटों के मामले में कांग्रेस चाहती है कि झामुमो कांग्रेस को पर्याप्त जगह दे। खास तौर पर कोल्हान की सीटों को लेकर कांग्रेस ने बड़ी उम्मीद लगा रखी है। कांग्रेस का मानना है कि चाईबासा की एकमात्र लोकसभा सीट उसके पास है, जबकि विधायक झामुमो के हैं। ऐसे में उसे यहां और सीटें चाहिए, ताकि खूंटी और कोल्हान में कांग्रेस का दबदबा पहले की तरह हो सके। इस मामले में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इरफान अंसारी कहते हैं कि जब हम हेमंत सोरेन को नेता मान रहे हैं, तो उन्हें भी हमारी बात रखनी चाहिए। समझौते की गाड़ी तब ही आगे बढ़ती है, जब दोनों पक्ष हाथ बढ़ायें। वहीं, हेमंत सोरेन ने इस मामले में पूछे जाने पर कहा कि यह बड़ा मसला नहीं है। जब सभी पक्ष एक साथ बैठेंगे, तो सभी मुद्दों पर बात होगी और रास्ता निकल जायेगा।
    कम से कम 25 सीटें चाहती है कांग्रेस
    महागठबंधन बनने में सीटें बाधक नहीं बनेंगी, ऐसी दोनों दलों के नेताओं को उम्मीद है। झामुमो को मुख्यमंत्री पद देने के एवज में कांग्रेस पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इसका संकेत पार्टी विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने पहले ही दे दिया है। लोकसभा चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन के आवास पर हुई एक बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि पार्टी कम से कम 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसमें सीटिंग सीट के अलावा वैसी सीटें भी शामिल हैं, जिनमें पार्टी उम्मीदवार 2014 के लोकसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। अगर स्थिति को देखें, तो 2014 के चुनाव के बाद से पार्टी के पास कुल 9 विधायक (पाकुड़, जरमुंडी, जामताड़ा, बरही, बड़कागांव, पांकी, लोहरदगा, कोलेबिरा और जगरनाथपुर सीट) हैं। वहीं, 9 सीटों पर पार्टी दूसरे स्थान पर थी। इसमें रामगढ़, बेरमो, धनबाद, झरिया, जमशेदपुर इस्ट, जमशेदपुर वेस्ट, खिजरी, कांके और डाल्टनगंज सीटें शामिल हैं।
    लोस चुनाव में सीटिंग सीटों पर तीन को छोड़ बाकी में पिछड़ी कांग्रेस
    2019 के लोकसभा चुनाव में मिले महागठंबधन के वोट शेयरिंग को देखें, तो कांग्रेस पार्टी के वर्तमान में जितने विधायक हैं, उसमें केवल तीन विधानसभा को छोड़ बाकी सीटों पर कांग्रेस पिछड़ी थी। वर्तमान विधानसभा में लोकसभा चुनाव के दौरान जेएमएम प्रत्याशी के पास पाकुड़, जामताड़ा और जेवीएम प्रत्याशी के पास जरमुंडी सीट थी।
    बाकी छह सीटों बरही बड़कगांव, पांकी, लोहरदगा, कोलेबिरा, जगन्नाथपुर सीट कांग्रेस प्रत्याशी के पास थी। आंकड़ों को देखें, तो बीजेपी प्रत्याशी की तुलना में केवल जामताड़ा (+16,000 वोटों), कोलेबिरा (+25,000 वोटों) और जगरनाथपुर में (+13,000 वोटों) से ही कांग्रेस ने बढ़त बनायी थी। अन्य 6 सीटों पाकुड़ (- 25,000 वोट), जरमुंडी (-50,000 वोटों), बरही (90,000 वोट), बड़कागांव (96,000 वोट), पांकी (90,000 वोट) और लोहरदगा में (12,000 वोटों) बीजेपी प्रत्याशी ने बढ़त बनायी थी।
    बहरहाल, आगामी विधानसभा चुनाव के कुछ माह ही शेष बचे हैं। कांग्रेस ने अपनी स्थिति का आकलन करने के बाद ही महागठबंधन को अंतिम रूप देने की ओर कदम बढ़ा दिया है। कांग्रेस को राज्य में भाजपा को शिकस्त देने के लिए महागठबंधन ही एक सहारा दिख रहा है। इस दिशा में कांग्रेस की तरफ से पहल कर दी गयी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार के समय में हुए समझौते अब भी कायम हैं। झामुमो नेताओं ने भी पहले तो रामेश्वर उरांव के बयानों को लेकर नाराजगी जतायी थी, पर अब नये सिरे से वे भी रिश्तों को आगे बढ़ाने में जुट गये हैं और वहां भी बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस भी यह जानती है कि अगर महागठबंधन नहीं बनता है, तो इसका खामियाजा उसे ही भुगतना होगा।

    लोस चुनाव में दूसरे स्थान पर रही सभी सीटों पर पिछड़े विपक्षी प्रत्याशी
    Þअगर 2014 में दूसरे स्थान पर रहनेवाले कांग्रेस की विधानसभा सीटों की स्थिति को देखें, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में इन सभी सीटों पर महागठबंधन प्रत्याशी (कांग्रेस भी शामिल है) बीजेपी प्रत्याशी को मिले वोट से पिछड़ गये थे। यानी इन सभी सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी को ही अधिक वोट मिले थे।

    2014 के चुनाव में रामगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को आजसू के चंद्रप्रकाश चौधरी ने 53818 वोटों से हराया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस से करीब एक लाख वोटों की बढ़त ली थी।

    2014 में बेरमो से कांग्रेस प्रत्याशी को बीजेपी के योगेश्वर महतो ने 12,613 वोटों से मात दी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जेएमएम प्रत्याशी से 42,000 वोटों की बढ़त ली थी।

    2014 में धनबाद सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को बीजेपी के राज सिन्हा ने 52,997 वोटों से हराया था। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस से करीब 75,000 वोटों की बढ़त ली थी।

    2014 में झरिया सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को बीजेपी के संजीव सिंह ने 3,692 वोटों से हराया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस से 45,000 वोटों की बढ़त ली थी।

    2014 में जमशेदपुर पूर्वी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को बीजेपी के रघुवर दास ने 70,157 वोटों से हराया था। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां पर बीजेपी ने जेएमएम प्रत्याशी से 1.2 लाख वोटों की बढ़त ली थी।

    2014 में जमशेदपुर पश्चिम पर कांग्रेस प्रत्याशी को बीजेपी के सरयू राय ने 10,517 वोटों से हराया था। वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जेएमएम प्रत्याशी से 60,000 वोटों की बढ़त ली थी।

    2014 में खिजरी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को बीजेपी के रामकुमार पाहन ने 64,912 वोटों से हराया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस से 19,000 वोटों की बढ़त ली थी।

    2014 में कांके सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को बीजेपी के डॉ जीतू चरण राम ने 59,804 वोटों के अंतर से हराया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस प्रत्याशी से 60,000 वोटों की बढ़त ली थी।

    2014 में डालटेनगंज सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को जेवीएम के आलोक कुमार चौरसिया (वर्तमान में बीजेपी में शामिल) ने 4,347 वोटों से मात दी। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने आरजेडी प्रत्याशी से करीब एक लाख वोटों की बढ़त ली थी।

    but still screws over seats Congress accepts Hemant's leadership
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