अजय शर्मा
रांची। बड़कागांव के बीडीओ राकेश कुमार और उनकी पत्नी ने नौकरानी के साथ जो घिनौना कृत्य किया, उसे सभ्य समाज कतई स्वीकार नहीं कर सकता। हजारीबाग के जिला प्रशासन की ओर से जांच के लिए अधिकृत मजिस्ट्रेट रैंक के दो अधिकारियों की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। इस रिपोर्ट पर एसडीपीओ ने भी मुहर लगा दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मात्र 200 रुपये की चोरी का आरोप लगा कर निर्दयी बीडीओ और उसकी पत्नी ने बच्ची को अमानवीय यातनाएं दी। गर्म आयरन से गर्दन में दागा गया। जब वह दर्द से कराह रही थी तो बीडीओ और उसकी पत्नी ने यह धमकी दी कि अगर वह चिल्लायेगी तो जान से हाथ धोना पड़ेगा। बच्ची के पूरे शरीर में जख्म हो गया था और वह दर्द से कराह भी रही थी। नाबालिग के बयान पर एक अक्टूबर को हजारीबाग के सदर थाना में बड़कागांव के बीडीओ और उसकी पत्नी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी। इस मामले का एक घिनौना पक्ष यह भी है कि कुछ अधिकारी उस आततायी बीडीओ की बचाने की घिनौनी कोशिश कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी केअनुसार जुलाई माह से बड़कागांव की रहनेवाली नाबालिग बच्ची को हजारीबाग में बीडीओ के आवास पर नौकरानी के रूप में रखा गया था।
बीडीओ आया, तो उसने भी पीटा
घटना के दिन बीडीओ हजारीबाग आया। उसकी पत्नी ने उसे बताया कि नौकरानी ने दो सौ रुपये की चोरी कर ली है। तब बीडीओ भी आग बबूला हो गया और उसे चप्पल से दमभर पीटा। उसे पकड़ कर कमरे में बंद कर दिया। हल्ला करने पर मारने की धमकी भी दी। नौकरानी जहां पढ़ती थी, उस स्कूल की ओर से दिये गये पासबुक को भी बीडीओ ने फाड़ कर फेंक दिया।
अनुसंधानक को निर्देश
अनुसंधानकर्ता को निर्देश दिया गया है कि गवाह रमा उरांव, विनोद करमाली, अरविंद टोप्पो के बयान लिये जायें। नौकरानी जिस स्कूल में पढ़ती थी, वहां से प्रमाण पत्र लिया जाये। अभियुक्त की पत्नी का नाम बीडीओ की सेवा पुस्तिका से निकाला जाये। दोनों को गिरफ्तार करें नहीं तो घर को कुर्क करें।
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