अमित दत्ता/स्वरूप भट्टाचार्य
रांची। नाम-राइमनी मुंडा। उम्र-37 साल। गांव-पानसकाम (दशम फॉल), बंडू। राइमनी के दादा फौदा मुंडा के नाम 85.30 एकड़ जमीन है। खुद राइमनी के नाम पर 7.10 एकड़ जमीन है, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि राइमनी मुंडा डेढ़ माह से कृषि लोन के लिए भटक रही हैं। बुंडू के कर्मचारी से लेकर सीओ तक ने जमीन की तहकीकात कर ली, सहमति दे दी और लोन के लिए उसे स्टेट बैंक के बुंडू ब्रांच में अग्रसारित कर दिया। बैंक उन्हें महज 50 हजार रुपये के लोन के लिए डेढ़ महीने से दौड़ा रहा है। दौड़ते-दौड़ते राइमनी हार चुकी हैं। अब उनकी अब सीएम हेमंत सोरेन से ही उम्मीद बची है।
राइमनी को भरोसा है कि जरूर इस मामले में सीएम हेमंत सोरेन हस्तक्षेप करेंगे और उनके खेत में हरियाली लौट आयेगी। पिछले तीन महीने से उनका खेत तैयार है, लेकिन पैसे के अभाव में वह खेती नहीं कर पा रही हंै। राइमनी कहती हंै कि आदिवासी होना क्या अपराध है। आखिर कृषि लोन देने में बैंक को दिक्कत क्या है। बार-बार बैंक इधर-उधर की बातें कह कर दौड़ा रहा है। वह बताती हैं कि सभी कागजात बैंक को दे चुकी हूं, लेकिन अब तक सिर्फ और सिर्फ दौड़ाया ही जा रहा है। जमीन के कागजात, वंशावली और एफिडेविट तक जमा कर दिया है, डेढ़ महीने से दौड़ाने के बाद अब स्टेट बैंक का बुंडू ब्रांच कह रहा है कि आपको तीन महीने बाद लोन मिलेगा।
आदिवासी हूं, इसलिए दौड़ा रहा बैंक, नहीं सुन रहे अधिकारी
राइमनी कहती है कि आदिवासी महिला हूं। कुछ करना चाहती हूं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से अब हौसले की उड़ान पर ब्रेक सा लग गया है। डेढ़ महीने पहले सोचा था कि खेती करूंगी। कई और महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिल जायेगा, लेकिन अब तो उम्मीद नहीं लग रही है। आदिवासी महिला हूं, कुछ करना चाहती हूं। इसी कारण बैंक दौड़ा रहा है। कर्मचारी से लेकर सीओ तक कागजात पर हस्ताक्षर करने के लिए दौड़ी। वहां से सहमति भी मिली। कहा गया कि बैंक दरवाजे पर आकर लोन देगा, लेकिन यह महज छलावा है। एक दर्जन बार बैंक का चक्कर काटने के बाद भी वह लोन नहीं दे रहा है। सरकार एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है। एक आदिवासी महिला के हौसले को तोड़ा जा रहा है। ऐसे में अब तो सिर्फ और सिर्फ सीएम हेमंत सोरेन से ही उम्मीद है। वह बताती हैं कि दादा फौदा मुंडा के तीन बेटे थे आचु मुंडा, बाजो मुंडा और संदीर मुंडा। वह संदीर मुंडा की बेटी हंै। उनके हिस्से में भी 7.10 एकड़ जमीन है, लेकिन खेत तैयार रहने के बाद भी अधिकारी मात्र 50 हजार का लोन मंजूर नहीं कर रहे हैं। राइमनी कहती हैं कि अब बैंक वाले कह रहे हैं कि पुराना मामला निष्पादित कर रहे हैं। नये लोन में अभी टाइम लगेगा। समझ में नहीं आ रहा कि क्या करूं।

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