नयी दिल्ली: नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने आज भी लोकसभा में नारेबाजी की और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने चर्चा किसी नियम के दायरे में कराने की बजाय शून्यकाल के तहत कराने का सुझाव दिया और इस मुद्दे पर सदन में 12 दिनों से बने गतिरोध को समाप्त करने का प्रयास किया लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।
आज कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राजद के नेताओं ने अपने रख में थोड़ा बदलाव करते हुए कहा कि यदि नियम 56 के तहत चर्चा के लिए सहमति नहीं बन रही है तो सरकार भी नियम 193 के तहत चर्चा के अपने रख से पीछे हटे और किसी ऐसे नियम में चर्चा कराई जाए जिसके बाद मतविभाजन हो सके।
सरकार ने तुरंत चर्चा शुरू करने पर सहमति जताई लेकिन मतविभाजन को तैयार नहीं दिखी।
वित्त मंत्री अरण जेटली ने कहा कि जनता की परेशानी पर अलग मत नहीं हंै और सभी जनता की परेशानियों को दूर करना चाहते हैं। इसलिए तत्काल चर्चा शुरू हो जानी चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह शून्यकाल शुरू करने के लिए कह चुकी हैं। दोनों ही पक्ष एक दूसरे के सुझाये नियमों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इसलिए ऐसा हो सकता है कि सब नियमों को अलग रखकर शून्यकाल के तहत चर्चा शुरू कर दी जाए।
उन्होंने शून्यकाल का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘शून्य से ब्रहमांड तक की खोज हो सकती है। हम सब मिलकर शून्य में कुछ खोजने का प्रयास करते हैं।’’ लेकिन दोनों पक्ष अपने अपने रूख पर कायम दिखे। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
इससे पहले आज सुबह प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस एवं वामदलों ने कल जम्मू कश्मीर में एक सैन्य शिविर पर आतंकवादियों के हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने की मांग की और सदन से वाकआउट किया।