खुद संभाली सीएम योगी ने कमान

यूपी में योगी सरकार के लिए निकाय चुनाव साख का सवाल बन गया है. छह महीने पहले बीजेपी अव्यवस्था और भ्रष्टाचार खत्म करने का दम भर कर सत्ता में आई थी. लिहाजा निकाय चुनाव में सूबे की अवाम योगी की सरकार को इन्हीं कसौटियों पर कसेगी. ऐसे में ये चुनाव सरकार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं. यही वजह है कि सीएम योगी ने इसमें पास होने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया. बीजेपी के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए योगी ने पूरे राज्य में जबरदस्त चुनावी दौरा किया और रैलियों की झड़ी लगा दी.

12 दिनों में ताबड़तोड़ 60 रैलियां

नगर पालिका और नगर पंचायत को लेकर योगी की संजीदगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें 33 सभाएं करनी थीं लेकिन वे इनकी तादाद बढ़ कर 60 तक ले गए. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बीजेपी ने पूरी ताकत लगाई. निकाय चुनावों में ग्रामीण इलाकों में पिछ़ड़ने के बीजेपी के रिकार्ड को दुरुस्त करने के लिए योगी ने सपा के गढ़ कुशीनगर, देवरिया, बलिया, मऊ,गाजीपुर, जौनपुर, चन्दौली, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, मेरठ, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, झांसी, फतेहपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, गोरखपुर में जम कर पसीना बहाया.

हर टिकट पर योगी की नजर

पिछले चुनावों में मेयर के 12 पदों में से दस सीटों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था. जिन दो सीटों इलाहाबाद और बरेली पर बीजेपी नहीं जीत पाई थी, उन पर टिकट बंटवारे को लेकर आखिरी वक्त तक चला मंथन यह बताने के लिए काफी है कि बीजेपी किस कदर मेयर की सभी सीटों पर कब्जे के लिए बेकरार है. इसमें इलाहाबाद की सीट पर तो संघ से लेकर सीएम और बाद में बीजेपी सुप्रीमो अमित शाह को दखल देना पड़ा. बीजेपी का कोई भी नेता इलाहाबाद की सीट पर जीत की गारंटी लेने से बचता रहा. बाद में एक कैबिनेट मंत्री ने अपनी पत्नी लिए यह कह कर टिकट मांगा कि वह किसी भी कीमत पर इस सीट पर कमल खिला कर रहेंगे.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या में सरयू नदी के किनारे पर प्रार्थना करते हुए

नगर पंचायत चुनावों में भी जीत की जिद

उत्तर प्रदेश में इस चुनाव में नगर निगम की 16, नगर पालिका की 198 और नगर पंचायतों की 438 सीटें हैं. 2012 चुनावों में बीजेपी नगर निगम की 12 में से 10 सीटें जीत कर सबसे आगे थी. नगर पालिका में 194 सीटों में से 130 पर समाजवादी पार्टी कब्ज़ा जमा कर बीजेपी से बहुत आगे रही थी. बीजेपी को सिर्फ 42 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. 423 नगर पंचायतों में से बीजेपी सिर्फ 36 स्थानों पर ही अपनी जीत दर्ज़ कर पाई थी. लिहाजा इस बार भाजपा नगर निगम के साथ नगर पालिका और नगर पंचायत में भी अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए पूरी ताक़त झोंकी दी. हर सीट पर पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए जो प्रचार से लेकर वोट खींचने तक की रणनीति बना रहे थे. जाति समीकरणों के आधार पर टिकट बांटे गए थे.

प्रचार के लिए नहीं उतरे एसपी और बीएसपी के दिग्गज

निकाय चुनावों के लिए भले ही योगी समेत बीजेपी के बड़े नेताओं ने पूरा दम लगाया हो लेकिन एसपी-बीएसपी के बड़े नेता प्रचार में नहीं उतरे. समाजवादी पार्टी पिछले निकाय चुनाव में मजबूती से लड़ी थी और बड़े नेताओं के प्रचार की वजह से उसे खासी सीटें मिली थीं. लेकिन पार्टी में कलह का असर इस चुनाव के प्रचार पर साफ दिखा. वहीं बीएसपी सुप्रीमो और उनकी पार्टी का भी कोई ब़ड़ा नेता निकाय चुनाव के प्रचार में नहीं उतरा. अलबत्ता कांग्रेस की ओर से काफी जोर-आजमाइश दिखी. राज्य में पार्टी के चीफ राजबब्बर कई चुनावी सभाएं ओर रोड शो किए.

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