बांग्ला फिल्मों के दिग्गज अभिनेता सौमित्र चटर्जी देश के उन विरल कलाकारों में से थे जो अपने जीवन काल में  लिविंग लेजेंड की तरह सम्मानित रहे हैं । सुप्रसिद्ध लेखक निर्देशक सत्यजीत राय के प्रसिद्ध जासूसी    किरदार फेलूदा को सुनहरे पर्दे पर जीवंत कर अपार लोकप्रियता हासिल करने वाले   सौमित्र चटर्जी का रविवार को निधन हो गया।  वह दिवंगत फिल्म किंवदंती महानायक उत्तम कुमार  के समकक्ष माने जाते रहे हैं। सत्यजित  राय की एक दर्जन से अधिक फिल्मों में अपनी अपार अभिनय क्षमता का प्रदर्शन करने वाले  सौमित्र सिनेमा के साथ रंगमंच से भी जुडे रहे। सत्यजीत राय के साथ उनकी   पहली मुलाक़ात  1956 में हुई थी। उस दौरान  राय ‘अपराजित’ के लिए नए चेहरे की तलाश कर रहे थे, तभी 20 वर्षीय सौमित्र उनसे मिले थे। निर्देशक सत्यजीत ने उनकी उम्र के कारण उन्हें उस समय मौका नहीं दिया था। लेकिन उन्होंने सौमित्र चटर्जी, को 1959 में फिल्म ‘अपुर संसार’ से अभिनय का मौका दिया । उसके बाद, सौमित्र  ने सत्यजीत रे की एक के बाद एक   14 फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने अपने 60 साल के अभिनय जीवन में दो सौ से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। सौमित्र चटर्जी को 2004 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया जबकि 2008 में निर्देशक सुमन घोष की फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया । रंग  मंच से लेकर बड़े पर्दे तक वह कवि और कलाकार दोनों रहे हैं। सिनेमा जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें  2012 में भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के से सम्मानित किया गया । फिर 2016 में, फ्रांसीसी सरकार का सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान “लीजन दनर” से भी सम्मानित हुए। सौमित्र चटर्जी का जन्म 19 जनवरी 1935 को कलकत्ता के मिर्जापुर स्ट्रीट में  हुआ था। उनका बचपन नदिया जिले के  कृष्णानगर में गुुुुजरा। पिता मोहित चटर्जी, पेशे से वकील और मां आशालता चटर्जी  गृहिणी थीं। हावड़ा जिला स्कूल से शुुुरुआती पढ़ाई  पूरी कर   सिटी कॉलेज से बंगाली में स्नातक और कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की । लेकिन अंत में उन्होंने अभिनय को कैरियर के रूप में चुना। सौमित्र चटर्जी अपने जीवन के आखिरी क्षणों तक अभिनय और सिनेमा से जुडे रहे।  85 वर्ष की आयु में  अभिनय जगत का यह उज्जवल नक्षत्र सदा के लिए विलीन हो गया।

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