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    Home»Top Story»झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने व स्थानीयता नीति विधेयक पास
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    झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने व स्थानीयता नीति विधेयक पास

    adminBy adminNovember 11, 2022Updated:November 11, 2022No Comments3 Mins Read
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    आजाद सिपाही संवादाता 

    रांची | झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने संबंधित विधेयक पारित कर दिया गया है। भाजपा ने भी इसका समर्थन किया है। झारखंड की स्थानीयता नीति निर्धारण करने संबंधित विधेयक भी पारित हो चुका है। अब 1932 या उसके पहले जिनका या जिनके पूर्वजों का नाम है वे स्थानीय होगें। इसके साथ ही तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरी सिर्फ स्थानीय को मिलेगी। जो भी लोग भूमिहीन है उसे ग्रामसभा चिन्हित करेगा।

    भाजपा वाले आदिवासियों को बोका समझते हैं: हेमंत सोरेन 
    झारखंड विधानसभा के संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बोले कि भाजपा वाले आदिवासियों को बोका (बेबकूफ) समझते हैं। ये बोका धो-पोछकर इनको बाहर कर देगा। भाजपा हमें नियमों में उलझाना चाहती है। ये चाहते हैं कि हम अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार लें।

    जेल में रहकर भी भाजपा का सूपड़ा साफ कर देंगे: हेमंत सोरेन
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा – हमें ईडी और सीबीआई से डराने की जरूरत नहीं, जेल में रहकर भी भाजपा का सूपड़ा साफ कर देंगे।

    दोनों विधेयक पर भाजपा का समर्थन
    विधानसभा में विधेयक पेश किया गया। इस दौरान भाजपा विधायक ने कहा, दोनों विधेयक पर हमारा समर्थन है। वहीं भानु प्रताप शाही ने भी समर्थन किया। इसके साथ ही अमित यादव ने आरक्षण बढ़ाने संबंधित प्रस्ताव को प्रवर समिति में भेजने का अनुरोध किया। बता दें कि रिक्तियों में आरक्षण का प्रस्ताव बहुमत से पारित कर दिया गया है।

    1932 खतियान को सत्तापक्ष के ही कई नेताओं ने किया था विरोध
    बता दें कि स्थानीयता के लिए 1932 के खतियान को आधार बनाने का सत्तापक्ष के ही कई नेताओं ने विरोध किया था। मांग उठाई गई कि उन जिलों को भी समाहित किया जाए, जहां 1932 के बाद जमीन का सर्वे हुआ है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया था कि प्रस्ताव में सबका ख्याल रखा जाएगा। सरकार ओबीसी समेत अनुसूचित जाति और जनजाति का आरक्षण प्रतिशत भी बढ़ाएगी।

    प्रस्ताव में ओबीसी का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत का प्रविधान है। इसी प्रकार अनुसूचित जाति का आरक्षण 10 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 26 से बढ़ाकर 28 प्रतिशत करने का प्रविधान है। ओबीसी आरक्षण में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (अनुसूची-एक) को 15 प्रतिशत और पिछड़ा वर्ग (अनुसूची-दो) का आरक्षण 12 प्रतिशत होगा। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत का आरक्षण पूर्व से निर्धारित है। इस प्रकार राज्य में आरक्षण 77 प्रतिशत होगा।

    क्यों आवश्यकता पड़ी, क्या राजनीतिक मायने
    झारखंड सरकार ने आनन-फानन में दोनों विधेयकों को विधानसभा के विशेष सत्र में पारित कराने की घोषणा की है। इसके पीछे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी द्वारा समन भेजे जाने को मुख्य कारण माना जा रहा है। अगर विपरीत परिस्थिति आई तो सत्तारूढ़ झामुमो और कांग्रेस गठबंधन को इसका आगामी चुनावों में फायदा मिल सकता है। सत्तारूढ़ गठबंधन दलों का यह चुनावी एजेंडा भी है। इससे इनका आधार वोट बैंक मजबूत होने की संभावना है।

    इरफान समेत तीनों विधायक भी इस एकदिवसीय सत्र में हुए शामिल
    विधानसभा के विशेष सत्र में कांग्रेस के तीन निलंबित विधायक इरफान अंसारी, नमन विक्सल कोनगाड़ी और राजेश कच्छप भी शामिल हुए। शुक्रवार को इन्हें कोलकाता की अदालत से नियमित जमानत मिल गई है। तीनों विधायकों को हावड़ा से 48 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया गया था। पूर्व में इन्हें सशर्त जमानत मिली थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि तीनों कोलकाता नहीं छोड़ सकते। गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने तीनों को निलंबित कर दिया था।

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