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    Home»विशेष»भाजपा के गढ़ उत्तरी छोटानागपुर को भेदने में जुटा इंडी गठबंधन
    विशेष

    भाजपा के गढ़ उत्तरी छोटानागपुर को भेदने में जुटा इंडी गठबंधन

    shivam kumarBy shivam kumarNovember 11, 2024Updated:November 11, 2024No Comments8 Mins Read
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    विशेष
    इस प्रमंडल के सात जिलों की 25 सीटों पर हो रहा है कांटे का मुकाबला
    जल-जंगल-जमीन की असली लड़ाई का गवाह है झारखंड का यह इलाका
    खेती-किसानी से खनिज संपदा तक में पूरे राज्य में है इस इलाके का दबदबा

    नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
    प्रशासनिक दृष्टि से झारखंड का सबसे बड़ा प्रमंडल है उत्तरी छोटानागपुर। इसके अंतर्गत सात जिले आते हैं और इन सात जिलों के लोग पांच सांसद और 25 विधायक चुनते हैं। इन सात जिलों में धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, चतरा और रामगढ़ आते हैं। उत्तरी छोटानागपुर झारखंड का सबसे अमीर प्रमंडल है, क्योंकि यहां खेती-किसानी से लेकर खनिज संपदा और उद्योग-धंधों की भरमार है। जिलों और सीटों की संख्या के लिहाज से उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की जमीन सत्ता के गलियारे तक पहुंचने के लिए सबसे मुफीद मानी जाती है। एक और खास बात यह है कि इन सात जिलों में एक भी सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित नहीं है। चार सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं। यह इलाका भाजपा-आजसू का गढ़ माना जाता है। 2019 के चुनाव में भाजपा को केवल 25 सीटें मिली थीं, जिनमें से इस प्रमंडल की 12 सीटें शामिल थीं। इससे साफ है कि भाजपा को सबसे ज्यादा समर्थन इसी प्रमंडल में मिला था। कांग्रेस को पांच सीटें, झामुमो को चार सीटें, आजसू, राजद, भाकपा माले और निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी।

    झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी इसी प्रमंडल से आते हैं। कहा जाता है कि इस प्रमंडल में उनका बहुत व्यापक जनाधार है। ‘लालखंड’ के नाम से मशहूर गिरिडीह-कोडरमा का इलाका बाबूलाल मरांडी की कर्मभूमि है। उत्तरी छोटानागपुर के सात जिलों की राजनीतिक अहमियत का पता इसी बात से चलता है कि यहां की एक-एक सीट पर हर दल ने पूरी ताकत झोंक रखी है और मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। क्या है उत्तरी छोटानागपुर का सियासी परिदृश्य, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।

    झारखंड के पांच प्रमंडलों में से एक उत्तरी छोटानागपुर सत्ता के गलियारे तक पहुंचने का सबसे उपयुक्त रास्ता माना जाता है। इसके सात जिलों में 25 विधानसभा क्षेत्र हैं। यह प्रमंडल पांच सांसद भी चुनता है। इस क्षेत्र में कोडरमा, रामगढ़, हजारीबाग, चतरा, गिरिडीह, बोकारो और धनबाद जिले शामिल हैं।
    झारखंड में पहले चरण में 13 नवंबर को उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की 25 में से सात, यानी कोडरमा, बरकट्ठा, बरही, बड़कागांव, हजारीबाग, सिमरिया और चतरा सीट के लिए वोटिंग होगी। प्रमंडल की शेष 18 सीटों के लिए 20 नवंबर को वोट डाले जायेंगे। जाहिर है कि एनडीए अपने 2014 के प्रदर्शन को दोहराना चाहेगा, जबकि इंडी गठबंधन चाहेगा कि भाजपा के इस गढ़ में कैसे ज्यादा से ज्यादा सेंधमारी की जा सके।

    आर्थिक रूप से सबसे समृद्ध है यह प्रमंडल
    झारखंड का उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल आर्थिक रूप से सबसे संपन्न है। इसकी वजह है धनबाद, चतरा और रामगढ़ की कोयला खदानें।
    दूसरी तरफ बोकारो स्टील प्लांट इसे अलग पहचान दिलाता है। उर्वर जमीन की बदौलत हजारीबाग के किसान काफी समृद्ध हैं। चतरा और गिरिडीह जिले में कभी नक्सलियों की पैठ हुआ करती थी, जो अब अंतिम सांसें गिन रहे हैं।

    प्रमंडल का राजनीतिक इतिहास
    2019 के चुनाव में भाजपा ने कुल 25 सीटें जीती थीं, जिनमें से 12 सीटें इस क्षेत्र की थीं। कांग्रेस ने पांच सीटें जीती थीं, जबकि झामुमो ने चार और राजद, भाकपा-माले और आजसू ने एक-एक सीट जीती थी, जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गयी थी। 2009 के चुनावों में भाजपा ने इस प्रमंडल में खराब प्रदर्शन किया था और केवल तीन सीटें ही जीत पायी थी। उस समय बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा ने सात सीटें जीत कर अपना दबदबा कायम कर लिया था। 2014 की ‘मोदी लहर’ में भाजपा ने यहां की 25 में से 16 सीटें जीतकर उल्लेखनीय वापसी की, जबकि उसके सहयोगी आजसू ने दो सीटें जीतीं।

    क्या है इस बार का परिदृश्य
    उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र इस बार भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां कई प्रमुख हस्तियां मैदान में हैं, जिनमें झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन शामिल हैं। ये दोंनों क्रमश: धनवार और गांडेय सीटों से चुनाव लड़ रही हैं। इस चुनाव में भाजपा ने प्रमंडल की 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि सहयोगी आजसू और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) क्रमश: चार और एक सीट पर चुनाव लड़ रही हैं। झामुमो और कांग्रेस ने 10-10 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे रहे हैं, जबकि बाकी सीटें राजद और भाकपा (माले) के बीच हैं।

    जयराम महतो की धमाकेदार इंट्री
    उत्तरी छोटानागपुर को झारखंड के सबसे ताकतवर जातीय समुदाय कुरमी का गढ़ माना जाता है। चतरा को छोड़ कर बाकी छह जिलों में इस जाति का दबदबा है। ऐसे में हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव में एक नयी राजनीतिक ताकत ने यहां धमाकेदार इंट्री की, जिसका इस समुदाय पर खासा प्रभाव है। जयराम महतो के नेतृत्व में झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति ने लोकसभा चुनाव में अच्छा-खासा वोट हासिल कर सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया है। इस तरह जयराम महतो क्षेत्रीय राजनीति का एक और नया कोण बन गये हैं। झारखंड की राजनीति में जो जातीय समीकरण है, उसमें वह काफी फिट बैठते हैं। चूंकि वह खुद कुरमी जाति से आते हैं और राज्य की राजनीति में कुरमी को आदिवासियों के बाद सबसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है, इसलिए उनका एक खास राजनीतिक दृष्टिकोण है। उनका मानना है कि राज्य में युवाओं की राजनीति में भागीदारी बहुत जरूरी है। युवाओं को सक्रिय रूप से आगे आना होगा, तभी जाकर राज्य की स्थिति बदल सकती है। जयराम महतो के इस नये सियासी उभार ने राज्य की स्थापित पार्टियों की टेंशन को जरूर बढ़ा दिया है। इसलिए विधानसभा के आसन्न चुनाव में उसके प्रदर्शन पर लोगों की निगाहें रहेंगी।

    गिरिडीह जिला है प्रमंडल की सियासत का केंद्र
    छह विधानसभा क्षेत्रों वाला गिरिडीह उत्तरी छोटानागपुर की सियासत का केंद्र है, क्योंकि बाबूलाल मरांडी और कल्पना सोरेन का क्षेत्र इसी जिले में है। मरांडी का मुकाबला इंडिया ब्लॉक के दो उम्मीदवारों – झामुमो के निजामुद्दीन अंसारी और माले के राजकुमार यादव से है। उधर कल्पना सोरेन गांडेय निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार मुनिया देवी का सामना कर रही हैं।

    डुमरी: झामुमो को किला बचाने की चुनौती
    गिरिडीह में एक और प्रमुख सीट डुमरी है, जो ‘टाइगर महतो’ के नाम से चर्चित जयराम महतो के कारण चर्चा में है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांति मोर्चा (जेएलकेएम) के संस्थापक जयराम महतो ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में अपने अप्रत्याशित प्रदर्शन से झारखंड में स्थापित पार्टियों को चौंका दिया। लोकसभा चुनाव में महतो ने आठ सीटों में उम्मीदवार उतारे, जिनमें से छह में वे तीसरे स्थान पर रहे और 8.20 लाख से अधिक वोट प्राप्त किये। बेबी देवी इस इलाके में ‘टाइगर’ के नाम से मशहूर रहे जगरनाथ महतो की विधवा हैं। उनके सामने जयराम महतो के अलावा आजसू की यशोदा देवी भी हैं। डुमरी उन पांच सीटों में से एक है, जहां से झामुमो पिछले 25 साल से नहीं हारा है।

    कोडरमा में नीरा-सुभाष का मुकाबला
    कोडरमा अपने अभ्रक खनन के लिए मशहूर है और कभी दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक था। कोडरमा में मौजूदा भाजपा विधायक नीरा यादव और जेल में बंद राजद उम्मीदवार सुभाष यादव के बीच मुकाबला है।

    चार एससी सीटों पर क्या रहा है समीकरण
    राज्य की 81 विधानसभा सीटों में नौ सीटें अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं। इनमें सबसे ज्यादा चार सीटें उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में हैं। 2019 के चुनाव में भाजपा ने इनमें से तीन, सिमरिया, जमुआ और चंदनक्यारी में जीत हासिल की थी। राजद के खाते में चतरा सीट गयी थी। 2014 के चुनाव में चतरा और जमुआ सीट पर भाजपा की जीत हुई थी। सिमरिया और चंदनक्यारी सीट जेवीएम के खाते में गयी थी, लेकिन जेवीएम के विधायक भाजपा में शामिल हो गये थे।
    चतरा सीट पर मौजूदा विधायक और मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने अपनी पुत्रवधू रश्मि प्रकाश को राजद के टिकट पर मैदान में उतारा है, क्योंकि झारखंड में भोगता समुदाय के अनुसूचित जाति से अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल हो जाने के बाद वे चुनाव नहीं लड़ सकते।

    झरिया में फिर देवरानी-जेठानी का मुकाबला
    कोयलांचल के नाम से प्रसिद्ध धनबाद के झरिया में मुकाबला देवरानी-जेठानी के बीच है। कांग्रेस पार्टी की निवर्तमान विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह का मुकाबला भाजपा उम्मीदवार रागिनी सिंह से है। पूर्णिमा के पति नीरज सिंह की हत्या के आरोप में रागिनी सिंह के पति संजीव सिंह जेल में हैं। दोनों एक ही परिवार की बहु हैं।

    इस तरह साफ है कि इस प्रमंडल में अपना वर्चस्व कायम रखना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है, जबकि झामुमो-कांग्रेस-राजद के लिए भाजपा-आजसू के साथ जयराम महतो को रोकना बड़ा चैलेंज है। इतना तय है कि उत्तरी छोटानागपुर की इन 25 विधानसभा सीटों पर इस बार कांटे का मुकाबला होगा, जिसमें दलों और प्रत्याशियों की परीक्षा तो होगी ही, इलाके की समस्याओं को कितना महत्व मिलता है, यह भी परखा जायेगा।

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