नेशनल डेस्क: झारखंड सरकार निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने जा रही है। अब स्कूल प्रबंधन बच्चों की फीस मनमाने ढंग से नहीं वसूल पाएंगे। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम के प्रस्ताव पर सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत नौ सदस्यीय एक समिति होगी जो किसी भी प्रकार की फीस बढ़ोतरी पर अपना फैसला देगी।

एक अन्य अहम फैसले में जिला उपायुक्तों को अधिकार दिया गया कि वे धार्मिक संस्थाओं का निरीक्षण कर सकेंगे। धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू होने के बाद अब जिलों में धर्म परिवर्तन करने के पूर्व और बाद में उपायुक्त को सूचित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही राज्य में 30 नए कालेजों के लिए 871 पदों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की गई है। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी शिक्षा मंत्री डा. नीरा यादव ने दी।

अभिभावकों ने ली राहत की सांस 
गौरतलब है कि झारखंड में निजी स्कूल मनमानी करते हुए फीस बढ़ाते आए हैं लेकिन अब शिक्षा न्यायधिकरण ऐसे स्कूलों पर डंडा चलाएगा। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक से पहले की रांची के कई निजी स्कूलों ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए फीस नहीं बढ़ाने का फैसला लिया। जिसमें आईसीएसई बोर्ड द्वारा संचालित संत थॉमस और डीपीएस जैसे स्कूल शामिल थे। राज्य सरकार और स्कूल के फैसले के बाद राज्य में अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।

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