धनबाद मंडल कारा से इलाज के लिए न्यायिक हिरासत में पीएमसीएच भेजे गए पूर्व मंत्री समरेश सिंह कमोड टॉयलेट के अभाव में पीएमसीएच से मंगलवार को सात घंटे गायब हो गए. इस पर ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में छह पुलिस कर्मियों को एसएसपी ने तत्काल निलंबित कर दिया. लेकिन समरेश सिंह प्रकरण ने पीएमसीएच की शौचालय व्यवस्था की पोल खोल दी है. यहां वृद्ध, लाचार, दिव्यांग और अस्थि रोग से पीड़ित मरीज इंग्लिस टॉयलेट के अभाव में देशी बेडपैन पर निर्भर हैं. इसके लिए भी प्रत्येक मरीज को बीस रूपए की कीमत चुकानी पड़ती है.

धनबाद का पीएमसीएच झारखंड का तीसरा सबसे बड़ा अस्पताल है. पांच सौ बेड के इस अस्पातल पर सरकार प्रत्येक वर्ष करोड़ों रूपए खर्च करती है. लेकिन सुविधाओं के मामले में इसकी बदहाली किसी से छिपी नहीं है. अस्पताल की साफ सफाई और शौचालय का हाल क्या है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि न्यायिक हिरासत में इलाज करा रहे पूर्व मंत्री समरेश सिंह को अंग्रेजी शैली वाली कमोड के लिए 12 दिसंबर को अस्पताल से बाहर अपने एक कार्यकर्ता के दफ्तर जाना पड़ा.दूसरी तरफ जेल के कैदी होने के कारण बिना सूचना के अस्पताल से बाहर जाने के आरोप में छह पुलिस कर्मियों निलंबित कर दिया गया. मालूम हो कि धनबाद पीएमसीएच में आर्थो विभाग चौथी मंजिल पर है. सोचने वाली बात है कि जिसका पैर टूटा हो या वृद्ध लाचार हो या फिर दिव्यांग हो उसके लिए चौथी मंजिल पर पहुंचना कितना कठिन होगा. जाहिर है कि अस्पताल प्रबंधन ने इनकी मुसीबत का ध्यान नहीं रखा है. कमोड टॉयलेट तो दूर अस्पताल का देशी शौचालय भी इस्तेमाल के लायक नहीं है.

गंदगी और बदबू से मरीज परेशान रहते हैं. स्वच्छ भारत अभियान अस्पताल को मुंह चिढ़ा रही है. अब तो पीएमसीएच के मरीजों को बेडपैन के लिए भी प्रत्येक दिन 20 रूपये सुविधा शुल्क चुकाना पड़ता है. ये अवैध राशि गरीब मरीजों पर एक बोझ की तरह है. लेकिन पीएमसीएच के प्रवक्ता डॉ. विकास राणा के अनुसार पीएमसीएच में भारतीय शैली का शौचालय अच्छी स्थिति में है. उन्होंने कहा कि कमोड शौचालय के लिए अस्पताल प्रबंधन सरकार से पत्राचार करेगी.

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