रांची। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के श्रमिकों का कल्याण और सर्वांगीण विकास वर्तमान सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए विभाग के रिक्त पदों को भरने के लिए जनवरी तक रोड मैप तैयार करें। श्रमिकों के लिए रफ्तार से काम करने वाली टीम बनायें। श्रमिक आजीवन मजदूर नहीं रहेंगे। झारखंड को श्रमिक प्रधान राज्य के रूप में पहचान मिली है, इससे बाहर निकलना होगा। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जरूरतें बदल चुकी हैं। इन जरूरतों के अनुसार नयी पीढ़ी को प्रशिक्षित करना होगा। उन्हें प्रोत्साहित करने और अवसर देने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में यह नयी पीढ़ी राज्य के सशक्त आधार बन कर उभरेंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को श्रम नियोजन प्रशिक्षण और कौशल विकास विभाग की समीक्षा बैठक कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच लाख से अधिक प्रवासी श्रमिक सरकार की जानकारी में हैं, इससे अधिक भी हो सकते हैं। उनका भी निबंधन करायें। इनके कल्याण के लिए विभाग कार्य योजना तैयार करें। अंतरराज्यीय पलायन की स्थिति और श्रमिकों की संख्या का जुटान करें। ऐसे श्रमिकों के लिए टोलफ्री नंबर जारी करें, जिससे वे अपनी परेशानी साझा कर सकें और सरकार को उनकी परेशानियों के निवारण का अवसर मिल सके। उनके मौन को गंभीरता से सुनने और समझने की जरूरत है।
बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण दें
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आइटीआइ में सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले बच्चों को बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देना उचित होगा। बाजार में सर्वे करायें। अगले पांच वर्ष में बाजार की मांग क्या होगी, उस मांग के अनुसार प्रशिक्षण दें, ताकि वे रोजगार-स्वरोजगार प्राप्त कर सकें। विभाग राज्य में संचालित उद्योगों से वार्ता कर प्रशिक्षित बच्चों के समायोजन की दिशा में कार्य करे।
श्रमिकों की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करें
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि विधायक के लिए वर्कशॉप का आयोजन कर श्रमिकों की लाभकारी योजना की जानकारी दें। इससे जनप्रतिनिधि क्षेत्र के श्रमिकों को लाभान्वित कर सकें।
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