रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं से संतुष्ट नहीं हैं। गुरुवार को विभागीय समीक्षा के दूसरे दिन उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया। उन्होंने समीक्षा बैठक के दौरान दिये गये निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट 15 दिन में देने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने सरकारी अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का भी निर्देश दिया। समीक्षा के दौरान सीएम ने राज्य में नये अस्पताल भवन बनाने पर रोक लगाने को कहा और खाली पड़े भवनों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया। सीएम ने कहा कि राज्यवासियों के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में ठोस व्यवस्था करने को प्राथमिकता देनी है। इसके लिए राज्य के 264 प्रखंडों, 45 अनुमंडलों और 24 जिलों में संचालित अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाये, जो चौबीसों घंटे सेवा प्रदान करने वाला हो, इस पर काम तत्काल शुरू किया जाये। इन अस्पतालों में आवश्यक मानव संसाधनों के लिए प्रस्ताव दें, जिससे चिकित्सकों, नर्सों, पारा मेडिकल स्टाफ समेत अन्य लोगों की कमी को पूरा किया जा सके। सीएम ने कहा कि अस्पतालों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाये। जो भवन तैयार हैं या निर्माणाधीन हैं, उनका भी उपयोग किया जाये। नये स्वास्थ्य भवन बनाने की फिलहाल आवश्यकता नहीं। कई भवन बन कर तैयार हैं, जो स्वास्थ्य विभाग के काम नहीं आ रहे। ऐसे में नया भवन का निर्माण फिलहाल व्यर्थ है। सरकार उपयोगिता के आधार पर नये भवन निर्माण हेतु निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राज्य से टीबी जैसे रोग का समूल नाश नहीं कर सके। करीब एक लाख कर्मचारी स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के लिए काम कर रहे हैं। उनकी क्षमता का सही उपयोग किया जाये। राज्य के लोगों को बेहतर सुविधा दी जाये।
एएनएम और जेएनएम के लिए युवक भी आगे आयें
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि एएनएम और जेएनएम के लिए युवक भी आगे आयें। स्वास्थ्य विभाग ऐसे युवाओं को प्रोत्साहित करे। सिर्फ महिलाएं ही इस क्षेत्र में हैं। इसकी पढ़ाई युवाओं को भी करनी चाहिए। युवाओं को रोजगार देने की दिशा में भी यह प्रयास सफल होगा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ग्रामीणों के लिए ऐसे युवक वरदान साबित होंगे।
तीन मेडिकल कॉलेजों में नामांकन पर लगी रोक हटाने की मांग की
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेशनल मेडिकल काउंसिल को पत्र लिखकर हजारीबाग, पलामू और दुमका मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के प्रवेश पर रोक के फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत माह भी पुनर्विचार से संबंधित आग्रह पत्र काउंसिल को भेजा गया था। सीएम ने पत्र में लिखा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से भी झारखंड के छात्रों के भविष्य के लिए ससमय विचार करने का अनुरोध कर चुका हूं।
टॉपरों को किया सम्मानित, विदेश में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप देने का एलान
झारखंड सरकार अब विदेश में पढ़ने के इच्छुक बच्चों को भी स्कॉलरशिप देगी। बहुत जल्द इसकी शुरुआत हो जायेगी। इसकी तैयारी लगभग आखिरी चरण में है। यह एलान सीएम हेमंत सोरेन ने गुरुवार को स्वच्छ विद्यालय एवं मेधावी छात्र पुरस्कार कार्यक्रम के दौरान किया। उन्होंने कहा कि इससे उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले बच्चों की परेशानी कम होगी। उन्होंने कहा कि कई बार बैंक भी बच्चों की मदद से इनकार कर देते हैं। ऐसे में सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी। सीएम ने कहा कि राज्य में बहुत गरीब बच्चे हैं, जो हुनर होने के बाद भी आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। इसी को ध्यान में रख कर मेधावी छात्र सम्मान योजना की शुरुआत की गयी है। इसके तहत सभी बोर्ड के बच्चों को इंटरमीडिएट, प्लस टू, मैट्रिक में अव्वल आने पर पुरस्कृत किया जायेगा, ताकि पैसे के कारण कभी भी उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। रिजल्ट के एक माह के अंदर हर हाल में यह राशि उन्हें उपलब्ध करा दी जायेगी। सीएम ने कहा कि राज्य में नेतरहाट स्कूल का होना गौरव की बात है। ऐसे कई स्कूल झारखंड में हैं। बेहतर को और बेहतर बनाने का सिलसिला अभी जारी है। मौके पर उन्होंने सरकारी विद्यालयों के लिए संचालित डिजिटल शिक्षा के तहत प्रारंभिक कक्षाओं हेतु डिजिस्कूल एवं माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं हेतु लर्नीटिक 2.0 प्लेटफॉर्म का औपचारिक शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार वितरण के तहत नौै श्रेणियों में चयनित 119 विद्यालयों में से सांकेतिक रूप से नौ विद्यालयों को मुख्यमंत्री ने पुरस्कृत भी किया। कार्यक्रम में स्वच्छता संरक्षण आधारित पुस्तक एवं विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित प्रशिक्षण मैन्युअल का विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण जैसी वैश्विक महामारी में ऐसे तो सभी सेक्टरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, परंतु सबसे ज्यादा प्रभाव स्कूली शिक्षा और स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को हुआ है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में बच्चों की पढ़ाई बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि सक्षम स्कूलों में पढ़ाई के कुछ रास्ते जरूर बनाये गये हैं, परंतु राज्यस्तर में बड़े पैमाने पर अभी पढ़ाई के अन्य माध्यमों पर काम करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव राहुल शर्मा, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शैलेश कुमार चौरसिया, माध्यमिक शिक्षा निदेशक जटाशंकर चौधरी सहित संबंधित विभाग के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
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