आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। रांची के मुंडा टोली की रहने वाली 60 वर्षीय महिला मरियम तिर्की आज दर-दर भटकने को मजबूर है। मरियम दिव्यांग है,बचपन से ही मरियम का एक पैर काम नही करता। चलने के लिए मरियम को लाठी के सहारे की जरूरत पड़ती हैं।
मात्र 1000 में चलाती है मरियम अपने महीने का गुजारा-भत्ता
जब आजाद सिपाही संवाददाता ने मरियम से उनके तकलीफ के बारे में जानने की कोशिश की तब मरियम ने बताया कि बताया कि वह इस दुनिया में अकेली है। माता-पिता का पहले ही देहांत हो चुका है और भाई बहन भी अब नहीं रहे। इसी के साथ मरियम ने कहा कि अपना गुजारा भत्ता चलाने के लिए उन्हें सरकार की तरफ से प्रतिमाह 1000 रूपए विकलांग पेंशन मिलता है, उसी में उनको खाना पीना रहना बाकी जरूरी की सभी अन्य चीजें भी करनी पड़ती है।विकलांग और वृद्ध होने के कारण कोई काम करने में भी मरियम सक्षम नही है।
पिछले 2 माह से नही मिल रहा पेंशन
मरियम ने यह भी बताया कि पेंशन भी उन्हें प्रतिमाह नहीं मिलता है पिछले 2 महीने से उन्हें पेंशन नहीं मिला है और इस वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
5000 नहीं होने के कारण नही मिला घर
मरियम ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नगर निगम के द्वारा मिलने वाले फ्लैट के लिए भी आवेदन दिया था। मगर आवेदन के बाद 5000 रुपये जमा करने के लिए नहीं होने के कारण उन्हें फ्लैट के लिए हो रहे लॉटरी में भी हिस्सा नही लेने दिया गया। तत्काल में किराए की मकान में रह रही मरियम का कहना है कि प्रतिमाह 1000 रुपये पेंशन में वह मिलने वाले घर के लिए कहां से 5000 जमा कर पायेंगी। इसके साथ ही किराए के घर मे उन्हें मकान मालिक के द्वारा किराये के पैसे नही दे पाने के कारण प्रताड़ित भी होना पड़ता है।
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