साहिबगंज। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि संताल परगना के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में बांग्लादेसी घुसपैठियों के आकर बसने की बात सामने आ रही है। इससे क्षेत्र की डेमोग्राफी बदल गयी है। अगर भाजपा की सरकार राज्य में बनी, तो संताल परगना में मिनी एनआरसी करायी जायेगी। बाबूलाल मरांडी स्थानीय अतिथि भवन में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 1932 के खतियान के आधार पर राज्य में स्थानीय और नियोजन नीति नहीं बन सकती है। सत्ताधारी दल के नेता लोगों को बरगलाने के लिए यह शिगूफा छोड़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में भी कभी 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय और नियोजन नीति की बात नहीं की थी। कुछ लोगों ने अफवाह उड़ा दी और अन्य लोगों ने बिना कुछ जाने समझे, उस पर विश्वास कर लिया। बाबूलाल ने कहा कि 1932 में सभी जिलों में सर्वे भी नहीं हुआ था। ऐसे में 1932 का खतियान कहां से आयेगा। कहा कि बजट सत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में कहा था कि 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय और नियोजन नीति संभव नहीं है। ऐसे में छह माह बाद ही यह संभव कैसे हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हेमंत सोरेन को लग रहा है कि सत्ता में उनके दिन पूरे हो चुके हैं। इसलिए राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। वैसे जनता सब कुछ समझ रही है। कहा कि रंग-गुलाल खेलनेवालों को लग रहा है कि तीन साल तक जनता को वेबकूफ बना लिया। अब आगे भी बनायेंगे। इससे वे खुश हैं। हेमंत सोरेन की विधायकी संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा-भाजपा कहां कुछ कर रही है। मुख्यमंत्री को लग रहा है कि उन्होंने खदान, जमीन आदि लेकर गलती की है, सो सदस्यता जायेगी। इसलिए इधर-उधर भागदौड़ कर रहे हैं। इडी की कार्रवाई के बाद पत्थर कारोबार के प्रभावित होने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार लोगों को रोजगार देना ही नहीं चाहती है। हेमंत सरकार में ढाई साल तक अवैध रूप से बड़े-बड़े क्रशर अवैध रूप से चलते रहे। सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की तो एनजीटी को रोक लगानी पड़ी। बाबूलाल ने कहा कि अब तो साबित हो चुका है कि अवैध कारोबार का पैसा सत्ता में बैठे लोगों तक पहुंचा।
Palamu Division
Kolhan Division
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
© 2026 AzadSipahi. Designed by Launching Press.

