रांची। आदिवासी मूलवासी समाज ने बुधवार को डोमिसाइल आंदोलन के शहीद कैलाश कुजूर, विनय तिग्गा और संतोष कुंकल को मेकॉन चौक पर श्रद्धांजलि दी। रवि पीटर ने कहा कि 24 जुलाई झारखंड के इतिहास में डोमिसाइल दिवस स्वर अक्षरों में अंकित है। आज ही के दिन झारखंडियों की पहचान, अस्मिता एवं खनिज संपदा को बचाने के लिए 24 जुलाई 2000 को डोमिसाइल आंदोलन में झारखंड के तीन वीर सपूतों का शहादत हुई थी। उन्होंने कहा कि आदिवासी मूलवासी समाज की अधिकार की लड़ाई जीवित है। दुर्भाग्य है कि 24 साल झारखंड अलग होने के बाद अनेकों कुर्बानियां देने के बावजूद झारखंडियों की पहचान अभी तक नहीं हुई, जो आदिवासी मूलवासी समाज के अस्तित्व के लिये खतरा है। डोमिसाइल आंदोलन का मुख्य मांग था थर्ड ग्रेड से लेकर फोर्थ ग्रेड तक के नौकरियों में 25 सालों तक आदिवासी मूलवासी समाज के लिए रिजर्व किया जाये। लेकिन इस आंदोलन को अलग रूप दिया गया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, रतन तिर्की, प्रभाकर तिर्की, राजू महतो, बैलेंस तिर्की, सरिता कुजूर, संजय कुजूर, अजीत कच्छप, विजय शंकर नायक, शिव कच्छप, आजम अहमद, अजीत भगत, सतीश सिंह, संजीवन कुमार, ललित महतो और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।
डोमिसाइल आंदोलन से आदिवासी मूलवासी की पहचान मिला: रवि पीटर
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