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    Home»विशेष»दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए तैयार है प्रथम यज्ञ नगरी
    विशेष

    दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए तैयार है प्रथम यज्ञ नगरी

    shivam kumarBy shivam kumarJanuary 13, 2025No Comments13 Mins Read
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    महाकुंभ: सनातन का परचम सदा के लिए बुलंद रहे
    -प्रयागराज सिर्फ तीन नदियों का संगम नहीं, सनातनियों के महाजुटान का गवाह रहा है
    -इस महाकुंभ में इतिहास रचनेवाले हैं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
    -144 साल के लंबे इंतजार के बाद सनातन का महाजुटान फिर से होने वाला है
    -प्रयाग में बज रही एक ही धुन महाकुंभ-महाकुंभ-महाकुंभ

    13 जनवरी सोमवार को उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ शुरू हो रहा है। प्रयागस्य पवेशाद्वै पापं नश्यति: तत्क्षणात्। यानी प्रयाग में प्रवेश मात्र से ही समस्त पाप कर्म का नाश हो जाता है। प्रयाग जहां सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम यज्ञ किया था। दुनिया के इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में अगले 45 दिनों तक करोड़ों लोग पवित्र स्नान के लिए संगम में डुबकी लगायेंगे। यह आयोजन सनातन का महाजुटान है। महाकुंभ मेला का हिंदू धर्म में एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व होता है। यह आयोजन 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चलेगा। महाकुंभ को लेकर यूपी सरकार का अनुमान है कि 40 करोड़ लोग संगम स्नान के लिए प्रयागराज आयेंगे। यानी कई देशों से ज्यादा आबादी। यह भारत की कुल आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। यह विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। हिंदू धर्म में कुंभ मेला हर 12 साल में चार पवित्र स्थलों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। लेकिन इस बार साल 2025 में कुंभ मेला नहीं, बल्कि महाकुंभ लग रहा है, जो 12 साल बाद नहीं बल्कि 144 साल बाद लग रहा है। यह महाकुंभ इसलिए भी खास है, क्योंकि 144 साल के बाद महाकुंभ का उल्लेख विशेष ज्योतिषीय या खगोलीय घटना की ओर संकेत करता है। प्रयागराज दुनिया के सबसे बड़े जनसमूह की मेजबानी करने के लिए तैयार है। तैयार हैं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी। यह उनके लिए गर्व का विषय है। योगी आदित्यनाथ इस आयोजन के माध्यम से खुद की नेतृत्व क्षमता का भी परिचय देंगे। इस महाकुंभ में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर 4 हजार हेक्टेयर में फैला, एक अस्थायी जिला बनाया गया है, जहां अगले 45 दिनों तक देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए आयेंगे। यानी हर दिन औसतन 90 लाख लोग महाकुंभ में आयेंगे। इस महाकुंभ के लिए लगभग 12,670 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार दोनों ने मिल कर 410 से अधिक परियोजनाओं को पूरा किया है। प्रशासन के लिए यह 45 दिनों का समय एक बड़ी परीक्षा होगी, जहां उन्हें बिजली-पानी की आपूर्ति, कचरा प्रबंधन, सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन सेवाएं जैसी चुनौतियों का सामना करना होगा। महाकुंभ मेला को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए योगी सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतेजाम किये हैं। महाकुंभ, जिसे पहले पूर्ण कुंभ कहा जाता था, हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है। जनवरी 2018 में, उत्तर प्रदेश सरकार ने एक कानून पारित करके पूर्ण कुंभ का नाम बदल कर महाकुंभ कर दिया। इसी तरह, हर छह साल में होने वाले अर्ध कुंभ को कुंभ मेला नाम दिया गया। 2018 में ही इलाहाबाद का नाम बदल कर प्रयागराज कर दिया गया। महाकुंभ मेला के बारे में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।

    कुंभ एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा है, जहां उन सभी सवालों का जवाब मिलता है, जो कइयों के मन में उठते रहते हैं। यह एक विश्वास की यात्रा है, जिसमें संस्कृति, सभ्यता और भक्ति के रंग घुले हुए हैं। न जाने कब से प्रयाग की पवित्र भूमि पर लाखों लोग बिना किसी निमंत्रण के जुटते रहे हैं। कुंभ मेला लोगों का ही संगम नहीं कराता, बल्कि भारतीय भाषाओं और लोक-संस्कृतियों का संगम भी बन जाता है। कुंभ मेले का आयोजन भारत में चार स्थानों पर होता है। इसमें हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज शामिल है। इस दौरान श्रद्धालु गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं। वहीं, प्रयागराज में लोग संगम में स्नान करते हैं।

    गजब का आकर्षण, अलौकिक, अद्भुत
    दूर-दूर तक संगम की पसरी रेत, त्रिवेणी का आंचल, संतों और साधुओं का रेला, ढलते सूरज की अरुणिमा में दीप्त चेहरे, जो लंबे सफर के बाद क्लांत हो चले हैं। क्या बड़ा, क्या छोटा, क्या वृद्ध, क्या बच्चा, क्या धनाढ्य, क्या गरीब, केवल एक ही कामना श्रद्धा की डुबकी लगानी है। गंगा, यमुना, सरस्वती की त्रिवेणी के साक्षी प्रयागराज में हर तरफ बस एक ही धुन गूंज रही है। महाकुंभ-महाकुंभ-महाकुंभ। महाकुंभ सनातन का परचम बुलंद रखने के लिए महाजुटान है। कुंभ का दर्शन जटिल है, तो बहुत सरल भी। कुंभ में आकर जो भाव मिलता है वैसा और कहीं नहीं। अंधेरा होते ही रेत पर जब हजारों खंभों पर खड़ी रोशनी गंगा में अपना अक्स देखती है, तो ये इलाका आसमान में बुनीं हुई हजारों आकाशगंगाओं सा नजर आता है। यह संतों का उत्सव है। सनातन का उत्सव है। अगले एक महीने यही उनका ठौर है, यहीं उनका ठिकाना है। प्रयाग की वह रेती, जहां 4 हजार हेक्टेयर में महाकुंभ नगर बसाया गया है। बारिशों वाली गंगा सिमट चुकी है। किनारे पर पूरे नगर की बसाहट हो चुकी है। 600 किमी लंबी चकर्डप्लेट की सड़कें हैं। इस छोर को उस छोर से मिलाने वाले 30 पैंटून पुल हैं। आसरा देने लाखों तंबू मजबूती से खड़े हैं। 13 किमी इलाके के 25 सेक्टर में एआइ आॅपरेटेड खंभे और चैट बोट्स के जरिये एक महीने के लिए मानो समुद्र मंथन वाला सतयुग तीर्थराज के डिजिटल युग में उतर आया है। संगम के किनारे अखाड़ों से लाउडस्पीकर पर आवाज। कहीं हनुमान चालीसा बज रहा है, कहीं किसी शिविर में कथा बांची जा रही है। कहीं कोई रामायण तो कहीं महाभारत के प्रसंगों का जिक्र किया जा रहा है। कोई गीता का सार पढ़ रहा है, तो कोई ध्यान में मग्न है। हर तरफ भगवा झंडा बुलंद है। सनातन का परचम बुलंद है। यह संतों का उत्सव है। अगले एक महीने यही उनका ठौर है। चारों ओर संत ही संत। कोई ब्रह्मचारी, कोई कोतवाल, कोई पुजारी, कोई महंत, कोई श्रीमहंत तो कोई पदाधिकारी और महामंडलेश्वर। कोई भगवा, कोई गेरुआ, कोई सफेद तो कोई काली पोषाक पहने। कोई गुरु के आगे दंडवत है, कोई साष्टांग है, कोई टखने तक झुकता है, तो कोई सिर्फ गुरु के पैरों के आगे की जमीन छू लेता है। किसी की आंखों में आंसू हैं, तो कोई आंखें भींचे मंत्र बुदबुदा रहा है। तंबू लग चुके हैं, बचे-खुचे काम को जल्दी पूरा कर देने की जल्दबाजी है। चोंगा पहने साधु, अपना टेंट खुद लगा रहे हैं। नागा अलाव जलाने के लिए लकड़ियां जुटा रहे हैं। सब्जी राम… रोटी राम.. दाल राम…। पंगत में साथ बैठे नागा, साधु, मजदूर, श्रद्धालु और कर्मचारी अपनी-अपनी थाली में परोसने का इशारा करते हैं। पंगत साथ बैठती है और फिर एक साथ भोजन खत्म कर उठती है। अग्नि अखाड़े ने सबसे पहले कुंभ नगरी में अन्नक्षेत्र शुरू किया था। यहां भगवा और सफेद रंग के शिविर में लंबी सी पंगत लगी है। हर दिन इस अन्नक्षेत्र में 1000 लोग खाना खाते हैं। बत्ती वाली गाड़ियों में सिर्फ पुलिस नहीं संत भी घूम रहे हैं। ये सनातन का लग्जरी एंगल है। कुंभ नगरी में बत्ती और हूटर वाली सबसे ज्यादा गाड़ियां संत, महंत, महामंडलेश्वरों की ही हं। आगे फॉर्चूनर पर महामंडलेश्वर जा रहे हैं। पीछे कम से कम 8 गाड़ियां और हैं। ऐश्वर्य और वैभव आभूषणों के हवाले कंठ और ऊंगलियों में कई तोले सोने में गढ़ा हुआ है। मती पत्थर और रूद्राक्ष माथे तक पर सजे हैं। कहीं सर्वसुविधायुक्त कॉटेज बने ह, कहीं इकोफ्रेंडली कुटिया है। वहीं कई कुटिया बमुश्किल घास फूस बांस और मोटे कपड़े से तैयार हुई है।

    144 साल बाद यानी 12 पूर्ण कुंभ के बाद आता है महाकुंभ
    अर्ध कुंभ हर छह साल में हरिद्वार और प्रयागराज में होता है। इसे कुंभ का आधा चक्र माना जाता है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, जब बृहस्पति वृश्चिक राशि में और सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब अर्ध कुंभ का आयोजन होता है।
    कुंभ हर 12 साल में चार स्थलों-हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। कुंभ मेले की पौराणिक कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है, जिसमें अमृत कलश के लिए देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ था।
    पूर्ण कुंभ, हर 12 साल में प्रयागराज में आयोजित होता है। इसे कुंभ का पूर्ण रूप माना जाता है और इसका महत्व अन्य कुंभ मेलों से अधिक है।
    महाकुंभ : भारतीय धार्मिक आयोजनों का सबसे बड़ा पर्व है, जो 12 पूर्ण कुंभ के बाद हर 144 साल में प्रयागराज में आयोजित होता है। इसे कुंभ मेले का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण रूप माना जाता है।

    महाकुंभ में स्नान और पूजा करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है
    कुंभ मेले का आयोजन ग्रहों और नक्षत्रों की विशिष्ट स्थिति के आधार पर किया जाता है। कुंभ मेला तब आयोजित होता है, जब सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति एक विशिष्ट स्थिति में होते हैं, लेकिन जब बृहस्पति मकर राशि में और सूर्य और चंद्रमा अन्य शुभ स्थानों पर होते हैं, तब महाकुंभ का समय बनता है और यह संयोग हर 144 वर्षों में एक बार आता है। इस संयोग को विशेष रूप से शुभ और दिव्य माना जाता है। हर 144 साल में एक दुर्लभ खगोलीय घटना होती है, जो कुंभ मेले को विशिष्ट बना कर महाकुंभ बना देती है। हिंदू ज्योतिषीय गणनाओं में 12 और 144 वर्षों के चक्र का महत्व बताया गया है। 12 साल के चक्र को एक सामान्य कुंभ मेला कहा जाता है और 12 कुंभ मेलों के बाद (12 गुणा 12=144 साल) महाकाल कुंभ या विशेष महाकुंभ आता है। शास्त्रों में कहा गया है कि महाकुंभ में स्नान और पूजा करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। इसे देवताओं और ऋषियों द्वारा भी अत्यधिक पवित्र माना गया है। पौराणिक कथाओं में अमृत मंथन की कथा में कुंभ मेले का उल्लेख मिलता है। यह माना जाता है कि हर 144 साल में अमृत कलश से विशेष ऊर्जा या दिव्यता पृथ्वी पर उतरती है, जिससे यह मेला और अधिक पवित्र हो जाता है।

    शाही स्नान को असंख्य यज्ञों, तपस्याओं और दान के बराबर माना जाता है
    साल 2025 में 144 साल बाद प्रयागराज में महाकुंभ मेले का आयोजन किया जा रहा है। महाकुंभ मेले में सबसे खास होता है शाही स्नान। शाही स्नान से प्राप्त पुण्य को असंख्य यज्ञों, तपस्याओं और दान के बराबर माना जाता है। महाकुंभ मेले में स्नान करना केवल शरीर को धोने का कार्य नहीं है, बल्कि यह आत्मा और मन की शुद्धि का भी प्रतीक है। महाकुंभ में स्नान करना एक विशेष खगोलीय स्थिति में अमृत के जल से स्नान करने के बराबर है। इसलिए इस समय स्नान करने का लाभ बाकी समयों में स्नान करने की तुलना में कई गुणा बढ़ जाता है। लेकिन महाकुंभ में सिर्फ स्नान नहीं बल्कि शाही स्नान (राजयोग स्नान) भी होता है, जो सबसे प्रमुख और विशेष धार्मिक अनुष्ठान है। यह स्नान महाकुंभ मेले का मुख्य आकर्षण होता है और इसे अखाड़ों के साधु-संतों, महंतों और महामंडलेश्वरों द्वारा किया जाता है। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि कुंभ मेले के शुभारंभ का प्रतीक भी माना जाता है।

    कब होगा शाही स्नान
    प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ का पहला शाही स्नान 13 जनवरी, सोमवार को होगा। लाखों की संख्या में भक्त संगम पहुंच रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा की शुरूआत 13 जनवरी 2025 को सुबह 5 बज कर 03 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 14 जनवरी को रात 3 बज कर 56 मिनट पर होगा। स्नान मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बज कर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। फिर विजय मुहूर्त दोपहर 2 बज कर 15 मिनट से 2 बज कर 57 मिनट तक रहेगा। इसके बाद गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बज कर 42 मिनट से 6 बज कर 09 मिनट तक रहेगा, जबकि निशिता मुहूर्त रात 12 बज कर 03 मिनट से 12 बज कर 57 मिनट तक रहेगा। महाकुंभ में कुल 6 शाही स्नान होते हैं, जिसमें पहला स्नान पौष पूर्णिमा यानी 13 जनवरी को किया जायेगा। वहीं, दूसरा शाही स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा। इसके बाद 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन तीसरा और 02 फरवरी को वसंत पंचमी के दिन चौथा शाही स्नान किया जायेगा। इसके अलावा आखिर के दो शाही स्नान 12 फरवरी, माघ पूर्णिमा और 26 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन आयोजित होंगे। कहते हैं कि शाही स्नान में भाग लेने से सभी पापों का नाश हो जाता है। साथ ही सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

    13 हजार से ज्यादा ट्रेनें, 25 शहरों के लिए फ्लाइट
    महाकुंभ के दौरान 3 हजार स्पेशल ट्रेनें शुरू की गयी हैं। ये ट्रेनें 13 हजार से अधिक फेरे लगायेंगी। जिले में प्रयागराज जंक्शन के अलावा 8 सब-स्टेशन हैं। ये कुल तीन जोन उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे में बांटे गये हैं। प्रयागराज से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, इंदौर, अहमदाबाद, कोलकाता, जयपुर, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, हैदराबाद, भोपाल, चेन्नई, पुणे, गोवा, नागपुर, जम्मू, पटना, गोवा, अयोध्या, रायपुर, देहरादून, जबलपुर, चंडीगढ़, बिलासपुर के लिए फ्लाइट रहेगी। इसी तरह से कानपुर, वाराणसी, जौनपुर, मिर्जापुर, चित्रकूट से आने वाली बसों को भी संगम से करीब 10 किलोमीटर पहले रोक दिया जायेगा। निजी वाहनों को सुविधानुसार ही आगे आने दिया जायेगा। प्रशासन ने पूरे जिले में कुल छोटी और बड़ी 102 पार्किंग बनायी हैं। इनमें 70% पार्किंग स्नान घाट से 5 किलोमीटर के अंदर हैं। बाकी 30% पार्किंग 5 से लेकर 10 किलोमीटर की दूरी पर हैं। 24 सैटेलाइट पार्किंग हैं, इनमें से 18 मेला क्षेत्र में और 6 प्रयागराज शहर में। यहां पीने का पानी, शौचालय, प्राथमिक इलाज, पब्लिक एड्रेस सिस्टम मौजूद है।

    महाकुंभ में रुकने की व्यवस्था
    महाकुंभ में आने वाले लोगों के लिए ठहरने की व्यापक व्यवस्था की गयी है। मेले में 10 लाख लोगों के रुकने की व्यवस्था की गयी है। इनमें फ्री और पेड दोनों तरह की व्यवस्था है। जैसे आप लग्जरी व्यवस्था चाहते हैं तो संगम के ही किनारे बस सकते हैं। वहां डोम सिटी बसायी जा रही। इसका किराया प्रतिदिन का 80 हजार रुपये से लेकर सवा लाख रुपये तक है। इसके आसपास 2000 कैंप की टेंट सिटी बनायी गयी है। यहां रहने पर आपको 3 हजार से लेकर 30 हजार रुपये तक देना होगा। इसके लिए बुकिंग भी पहले करानी होगी। पूरे शहर में 42 लग्जरी होटल हैं। सभी की अपनी वेबसाइट है, जिसके जरिए आप उनके बारे में जान सकते हैं और बुक कर सकते हैं। इसके अलावा मेला क्षेत्र में 100 आश्रयस्थल हैं, हर आश्रयस्थल में 250 बेड हैं। 10 हजार से अधिक स्वयंसेवी संस्थाओं ने श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की है। संगम के अलावा आप लेटे हनुमान मंदिर, श्री अक्षयवट मंदिर, पातालपुरी मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, नागवासिकी मंदिर, शंकर विमानमंडपम, चंद्रशेखर आजाद पार्क, स्वराज भवन, खुसरो बाग, निषादराज पार्क भी घूम सकते हैं।

    सुरक्षा घेरा
    महाकुंभ मेला को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए योगी सरकार ने कड़े सुरक्षा का इंतजाम किये हैं। इस बार एआइ तकनीक को पुलिस ने अपना हथियार बनाया है। करीब 3 हजार एआइ सीसीटीवी महाकुंभ नगर में लगाये गये हैं, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जायेगी। महाकुंभ मेले के दौरान 37 हजार पुलिसकर्मी और 14 हजार होमगार्ड तैनात किये गये हैं। इसके साथ ही एनएसजी, एटीएस, एसटीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी चौकसी बरत रही हैं। सीसीटीवी और खुफिया एजेंसियों की निगरानी में हर कोना सुरक्षित है।

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