यूपी के शाहजहांपुर में मैगी के सैंपल फेल होने और जिला प्रशासन द्वारा 35 लाख का जुर्माना लगाए जाने के बाद नेस्ले ने सफाई दी है। कंपनी ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि हो सकता है टेस्ट करने में गलत मानकों का प्रयोग किया गया है, क्योंकि 2015 में किसी तरह के मानक तय नहीं थे।
नेस्ले ने कहा है कि जिन सैंपल को टेस्ट किया गया है वो 2015 के हैं। उनमें एश कंटेट (धातु भस्म) की मात्रा निर्धारित मानक से कई गुना अधिक गई थी। अभी कंपनी को जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है, जैसे ही यह मिलेगी उस पर तुरंत अपील दायर की जाएगी। कंपनी ने आगे कहा कि मैगी 100 फीसदी खाने के लिए सुरक्षित है।
17 लाख का इन पर लगा जुर्माना
मैगी के जो नमूने जांच में फेल हुए, वे नेस्ले कंपनी की पंजाब के मोगा शहर और उत्तराखंड में पंतनगर स्थित फैक्ट्रियों में निर्मित पाए गए। इस संबंध में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों की सुनवाई करके सोमवार को न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम जितेंद्र कुमार शर्मा ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 51 के तहत नेस्ले कंपनी को 35 लाख रुपये और उसकी दो निर्माण इकाइयों के संचालकों को पांच-पांच लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त इन्हीं मामलों में विक्रेताओं और वितरकों पर एडीएम शर्मा ने 17 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।