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    Home»ताजा खबरें»प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में गिनाई देश की उपलब्धियां, बताया प्रेरणादायक
    ताजा खबरें

    प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में गिनाई देश की उपलब्धियां, बताया प्रेरणादायक

    shivam kumarBy shivam kumarJuly 27, 2025No Comments6 Mins Read
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    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देश और देशवासियों को विभिन्न क्षेत्रों में मिली सफलताओं और उपलब्धियों पर चर्चा की। उन्होंने विज्ञान, खेल, संस्कृति, और इतिहास में भारतीयों की उपलब्धियों को अपने कार्यक्रम में शामिल किया।

    रेडियो पर प्रसारित ‘मन की बात’ की 124वीं कड़ी में प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में देश में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटी हैं, जिन पर हर भारतवासी गर्व महसूस करता है। उन्होंने शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षित वापसी ने पूरे देश को खुशी से भर दिया। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कैसे अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग ने देश में एक नया माहौल बनाया था। यह घटना बच्चों में स्पेस साइंस के प्रति नई जिज्ञासा उत्पन्न करने में सहायक बनी है।

    प्रधानमंत्री ने बच्चों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे इंस्पायर मानक अभियान का भी जिक्र किया। इस अभियान के तहत हर स्कूल से पांच बच्चों का चयन किया जाता है, जो नए विचार लेकर आते हैं। इस पहल में अब तक लाखों बच्चे जुड़ चुके हैं, और चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इनकी संख्या दोगुनी हो गई है। उन्होंने बताया कि भारत में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या 50 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। यह दर्शाता है कि देश में स्पेस क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को कितना बढ़ावा मिल रहा है।

    अगले महीने 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाए जाने की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सुझाव मांगे कि वे इसे कैसे मनाना चाहेंगे। उन्होंने छात्रों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जब भारतीय छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय रसायन ओलंपियाड में मेडल जीते। देवेश पंकज, संदीप कुची, देबदत्त प्रियदर्शी और उज्ज्वल केसरी जैसे छात्रों ने भारत का नाम रोशन किया। गणित के क्षेत्र में भी भारत ने अपनी पहचान को मजबूत किया है, जहां ऑस्ट्रेलिया में हुए अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में हमारे छात्रों ने 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।

    प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि अगले महीने मुंबई में एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स ओलंपियाड होने जा रहा है, जिसमें 60 से ज्यादा देशों के छात्र भाग लेने आएंगे। यह अब तक का सबसे बड़ा ओलंपियाड होगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अब ओलंपिक और ओलंपियाड दोनों के लिए आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने यूनेस्को में 12 मराठा किलों को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दिए जाने की खबर पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने इन किलों के ऐतिहासिक महत्व और उनकी सांस्कृतिक धरोहर की जानकारी दी। सल्हेर का किला, शिवनेरी, खानदेरी और प्रतापगढ़ जैसे किलों की गाथाओं को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि हर किला एक ऐतिहासिक घटना का गवाह है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इन किलों की यात्रा करें और अपने इतिहास को जानें।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अगस्त का महीना क्रांति का महीना है, जिसमें कई महत्वपूर्ण घटनाएँ हुई थीं, जैसे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि और गाँधी जी के नेतृत्व में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को याद करें और उनसे प्रेरणा लें। प्रधानमंत्री ने 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने की अपील की, जिससे देशवासी उन लोगों को याद कर सकें, जिन्होंने विभाजन की पीड़ा सही।

    उन्होंने विशेष रूप से स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस का जिक्र किया, जिन्होंने केवल 18 वर्ष की आयु में देश के लिए अपनी जान दी। उन्होंने कहा, “बिहार का मुजफ्फरपुर शहर में 11 अगस्त 1908 को सिर्फ 18 साल की उम्र में बोस ने वो साहस दिखाया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। तब अखबारों ने भी लिखा था –खुदीराम बोस जब फांसी के फंदे की ओर बढ़े, तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी।” प्रधानमंत्री ने पांडुलिपियों के रूप में सहेजे गये ज्ञान को भारत की असली ताकत बताया और कहा कि भारत की संस्कृति का आधार हमारे त्योहार और परंपराएं हैं। मणि मारन जैसे प्रेरणादायक व्यक्तित्वों ने तमिल पांडुलिपियों को पढ़ाने के लिए कक्षाएँ शुरू कीं, जिससे नई पीढ़ी इस अनमोल धरोहर से जुड़ सके। ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत इन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा, जिससे ये ज्ञान विश्वभर के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध होगा।

    उन्होंने ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ का भी उल्लेख किया और बताया कि कैसे देश के विभिन्न हिस्सों में महिलाएं इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं। महाराष्ट्र के पैठण गाँव की कविता धवले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वह सरकार की मदद से अब तीन गुना ज्यादा कमा रही हैं। उन्होंने उड़ीसा के मयूरभंज की आदिवासी महिलाओं की सफलता की कहानी भी साझा की, जिन्होंने संथाली साड़ी को पुनर्जीवित किया है और अब हजारों रुपये कमा रही हैं। प्रधानमंत्री ने ओडिशा में पर्यावरण संरक्षण के लिए पारंपरिक गीतों का उपयोग करने वाले एक समूह का उदाहरण सामने रखा। राधाकृष्ण संकीर्तन मंडली ने लोगों को जंगलों की सुरक्षा के लिए जागरूक किया है। प्रमिला प्रधान की पहल ने यह साबित किया है कि हमारी लोक परंपराएँ आज भी समाज को दिशा देने की शक्ति रखती हैं।

    उन्होंने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलाइजेशन की दिशा में सरकार की पहलों की जानकारी दी। मणि मारण का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे उन्होंने तमिल पांडुलिपियों को पढ़ाने का कार्य शुरू किया। इसके माध्यम से नए शोधकर्ताओं ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली पर अध्ययन शुरू किया है। प्रधानमंत्री ने झारखंड के गुमला जिले में मछली पालन के माध्यम से बदलाव लाने वाले एक युवक का उदाहरण प्रस्तुत किया। ओमप्रकाश साहू ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मछली पालन शुरू किया और अपने जैसे कई साथियों को भी प्रेरित किया। आज बासिया ब्लॉक में 150 से ज्यादा परिवार मछली पालन से जुड़े हुए हैं।

    प्रधानमंत्री ने ‘वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स’ में भारत की सफलता को साझा किया, जहां देश ने 600 से अधिक मेडल जीते। उन्होंने ‘खेलो भारत नीति 2025’ की सराहना की, जिसका उद्देश्य भारत को खेलों में सुपर पावर बनाना है। प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन की सफलता की कहानियों सुनाई। उन्होंने कहा कि 11 वर्षों में यह मिशन एक जन आंदोलन बन चुका है। स्वच्छ सर्वेक्षण ने इस भावना को और बढ़ाया है। उन्होंने विभिन्न शहरों में स्वच्छता के उपक्रमों की चर्चा की, जैसे उत्तराखंड में कीर्तिनगर का उदाहरण, जहाँ लोग पहाड़ों में वेस्ट मैनेजमेंट की नई मिसाल कायम कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने भोपाल की महिलाओं की टीम ‘सकारात्मक सोच’ का उदाहरण दिया । यह महिलाएं सिर्फ सफाई नहीं करती, बल्कि समाज में सकारात्मकता फैलाने का कार्य भी करती हैं। उन्होंने गोवा के पणजी शहर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ कचरे को 16 श्रेणियों में बांटा जाता है और इसका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। सावन की फुहारों के बीच प्रधानमंत्री ने सभी को त्योहारों की शुभकामनाएं दी और कहा कि ये पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने का संदेश देते हैं।

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    shivam kumar

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