पटना। ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉई एसोसिएशन समेत विभिन्न प्रमुख यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को बिहार की राजधानी पटना सहित पूरे राज्य में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं। 11 सूत्री मांगों के समर्थन में राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों (Nationalized Banks) में ताले लटके रहे। इस एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल से न केवल आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, बल्कि करोड़ों रुपये का चेक क्लियरिंग और कैश लेनदेन भी प्रभावित हुआ।
बैंकों के गेट पर जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी गुरुवार सुबह से ही बैंक कर्मचारी अपनी शाखाओं के बाहर जमा होने लगे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य प्रमुख बैंकों के कर्मचारियों ने मुख्य द्वारों पर धरना दिया। प्रदर्शन में शामिल सुनील कुमार, विजेंद्र कुमार और नरोत्तम कुमार जैसे कर्मियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती, तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा।
11 सूत्री मांगें: निजीकरण से लेकर ओपीएस तक हड़ताल कर रहे बैंक कर्मियों की मुख्य नाराजगी बैंकों और बीमा कंपनियों के निजीकरण के प्रस्ताव को लेकर है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
मजदूर विरोधी लेबर कोड को तत्काल वापस लिया जाए।
सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों में 100 फीसदी एफडीआई (FDI) पर रोक लगे।
नई पेंशन योजना (NPS) को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए।
बैंकों में आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा बंद कर स्थायी नियुक्तियां की जाएं।
कॉर्पोरेट घरानों से बकाये ऋण (NPA) की सख्ती से वसूली हो।
आम ग्राहकों पर थोपे गए भारी बैंकिंग सेवा शुल्क में कमी की जाए।
ग्राहकों की बढ़ी मुश्किलें हड़ताल के कारण पटना के मुख्य व्यापारिक केंद्रों में कारोबार पर बुरा असर पड़ा। सैकड़ों ग्राहक बैंक पहुंचे लेकिन काम न होने के कारण उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। हालांकि, कुछ निजी बैंकों और एटीएम सेवाओं ने आंशिक राहत देने की कोशिश की, लेकिन पासबुक अपडेट, आरटीजीएस और बड़े लेनदेन के लिए लोगों को भारी किल्लत झेलनी पड़ी। बैंक कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ एक चेतावनी है, मांगें पूरी न होने पर राष्ट्रव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

