रांची। झारखंड के कोषागारों (ट्रेजरी) से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले ने राज्य सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बोकारो के बाद अब हजारीबाग में भी 15 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। हजारीबाग की यह घटना काफी हद तक बहुचर्चित चारा घोटाले के पैटर्न की याद दिलाती है, जहां विभिन्न जिलों की ट्रेजरी से फर्जी तरीके से पैसे निकाले गए थे। हजारीबाग में सामने आए इस मामले की खास बात यह है कि यहां भी पुलिस विभाग से जुड़े लोगों की संलिप्तता दिख रही है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर शंभू और पंकज नामक दो पुलिसकर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इन पर आरोप है कि इन्होंने बोकारो के आरोपी एकाउंटेंट कौशल पांडेय की तरह ही मिलीभगत कर सरकारी धन का गबन किया है।
इस बड़े वित्तीय घोटाले की पुष्टि खुद राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने की है। उन्होंने बताया कि हजारीबाग में पिछले 10 वर्षों के दौरान करीब 15 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग के उपायुक्त जांच कर रहे हैं, साथ ही वित्त विभाग मुख्यालय से एक विशेष टीम भी वहां भेजी जा रही है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी 33 कोषागारों और उप-कोषागारों की विस्तृत जांच कराई जाएगी क्योंकि सरकार वित्तीय कुप्रबंधन और धोखाधड़ी को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। वहीं, बोकारो में हुए घोटाले की परतें भी लगातार खुल रही हैं। यहां एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी उपेंद्र सिंह के वेतन मद से 4.29 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी एकाउंटेंट कौशल पांडेय और उनकी पत्नी के बैंक खातों में भारी भरकम राशि जमा होने के सबूत मिले हैं, जिसके बाद पुलिस ने कौशल पांडेय को गिरफ्तार कर लिया है और संबंधित खातों को फ्रीज कर दिया गया है। वित्त विभाग के सूत्रों का मानना है कि यदि पूरे राज्य के स्तर पर निष्पक्ष जांच हुई, तो अवैध निकासी का यह आंकड़ा 100 करोड़ रुपये के पार भी जा सकता है। सरकार ने इसके लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर आगे की कार्रवाई तेज कर दी है।

