-पुराने अस्पताल परिसर के सामने मिलीं फाइलेरिया रोधी गोलियां, स्कूली बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा पर खतरा
-तत्कालीन उपायुक्त के निर्देश के बावजूद कार्रवाई पर सवाल, करीब 18 वर्षों से बरवाडीह में कार्यरत फार्मासिस्ट की पदस्थापना भी चर्चा में
बरवाडीह। सरकारी दवाओं का खुले में फेंका जाना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बरवाडीह में एक बार फिर पुराने अस्पताल परिसर के ठीक सामने डाइएथिलकार्बामाजीन साइट्रेट (Diethylcarbamazine Citrate) 100 mg की फाइलेरिया रोधी गोलियां खुले में फेंकी हुई मिली हैं। जिस जगह दवाएं पड़ी हैं, वहां से स्कूली बच्चों का लगातार आना-जाना होता है। आसपास मवेशी भी चरते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकारी दवाओं को इस तरह लावारिस हालत में किसने और क्यों फेंका?मौके पर बिखरी दवाओं की तस्वीरें सरकारी दवाओं के सुरक्षित भंडारण और निस्तारण की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। सरकार लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए दवाएं उपलब्ध कराती है, लेकिन यदि वही दवाएं अस्पताल परिसर के सामने खुले में फेंकी मिलें तो जवाबदेही किसकी होगी? क्या दवाओं के रखरखाव और वितरण की निगरानी करने वाले अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है?
पहले भी उठे थे सवाल, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
मामले को और गंभीर बनाता है फार्मासिस्ट की पदस्थापना से जुड़ा सवाल। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, तत्कालीन उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने पूर्व में फार्मासिस्ट आलोक तिवारी को हटाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद संबंधित फार्मासिस्ट पर कार्रवाई नहीं होने और उनके करीब 18 वर्षों से बरवाडीह में कार्यरत रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पूर्व के निर्देश और उस पर हुई कार्रवाई की वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?
पुराने अस्पताल के सामने खुले में पड़ी गोलियां बच्चों और मवेशियों के संपर्क में आ सकती हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि दवाओं को तत्काल वहां से हटाया जाए और यह पता लगाया जाए कि वे कहां से आईं, किसकी अभिरक्षा में थीं तथा उन्हें खुले में किसने फेंका।
जांच हो, जिम्मेदारी तय हो और कार्रवाई भी
स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों को मामले की जांच कर दोषियों की पहचान करनी चाहिए। यदि लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।सबसे बड़ा सवाल यही है—बरवाडीह में सरकारी दवाएं खुले में फेंके जाने की घटनाओं पर रोक कब लगेगी और जिम्मेदारों की जवाबदेही आखिर कब तय होगी?


